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Home » इकोनॉमी » फॉरेन ट्रेडhow India is benefits from US-china trade war on front of soybean

जिस चीज के लिए भिड़े अमेरिका और चीन, उसी से भारत ने कर ली कमाई

चीन में बढ़ी भारत के सोयाबीन की मांग, दो गुनी कमाई की उम्मीद

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 नई दिल्ली। चीन-अमेरिका के बीच छिड़ी ट्रेड वार ने सीधे तौर पर भारत को फायदा पहुंचाने का काम किया है। भारत को यह फायदा कमोडिटी खासकर सोयाबीन को लेकर हुआ है। ट्रम्प की ओर से छेड़ी गई ट्रेड वार के बाद चीन ने अमेरिका से आने वाली जिन चीजों पर हैवी ड्यूटी लगाई उसमें सोयाबीन भी शामिल है। ड्यूटी के चलते सोयाबीन चीन के घरेलू मार्केट में महंगा हो गया। कम कीमत होने के चलते भारतीय सोयाबीन की चाइनीज मार्केट में डिमांड बढ़ गई है। हाल के दिनों में देश में सोयाबीन की कीमतों और डिमांड दोनों में तेजी देखने को मिली है। इसका सीधा फायदा देश के किसानों को हुआ है।  

बढ़ेगा सोयाबीन का एक्सपोर्ट 
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेड वॉर के चलते अन्य कमोडिटीज के साथ सोयाबीन के फॉरवर्ड एक्सपोर्ट सौदे में दोगुनी बढ़त देखने को मिली है। सीधी भाषा में कहें तो सोयाबीन की एक्सपोर्ट से भारत को होने वाली आमदनी में दोगुने की बढ़ोतरी होने जा रही है। इसी का नतीजा है कि नए सीजन से ठीक पहले पिछले एक महीने में सोयाबीन का दाम करीब 5 फीसदी बढ़ गया है।  चीन में भारतीय सोयामील मांग बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। चीन ने भारतीय सोयामील से इंपोर्ट ड्यूटी हटाया है। 

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हालांकि रुपए में कमजोरी से कमाई का डर 
अगले महीने से नई फसल की आवक होने वाली है। ट्रेड वॉर से एक्सपोर्ट को सपोर्ट संभव है। इस साल ऑयल मील एक्सपोर्ट 21 फीसदी बढ़ा है। इस साल रुपए में करीब 14 फीसदी की कमजोरी हुई है। ऐसे में बढ़ा एक्सपोर्ट मोनेटरी टर्म में कितना फायदा होगा, यह देखने वाली बात होगी। 

 

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13 मिलियन टन  उत्पादन 
बता दें कि सोयाबीन के उत्पादन की बात करें तो यह 2016-17 में 13 मिलियन टन था। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान इसके बड़े उत्पादक हैं। हालांकि, बारिश की कमी और फसल खराब होने की वजह से इसके उत्पादन में कमी आ रही है। सोयाबीन की ग्लोबल पैदावार पर नजर डालें तो साल 2014-2015 में 32 करोड़ टन की पैदावर हुई थी जबकि 2016-2017 में बढ़कर 35.13 करोड़ टन रही है। वहीं साल 2018-2019 में सोयाबीन की पैदावार 36.93 करोड़ टन रही है।

 

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सफेद सरसों की डिमांड में तेजी 
सोयाबीन की तरह की सफेद सरसों की डिमांड भी चीन में बढ़ने की संभावना है। यही नहीं करीब सात साल पहले  खराब क्वॉलिटी का हवाला देकर चीन ने  भारतीय सफेद सरसों खरीदने पर बैन लगा दिया था। इसी हफ्ते चीन में मौजूद भारतीय दूतावास ने उससे  को हटाने की बात कही है। यह सरसों पशुओं के लिए प्रोटीन का सोर्स होती है। 2015-16 में भारत में सफेद सरसों का उत्पादन 6,820 किलो टन था। इसका ज्यादा उत्पादन राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में होता है। 

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