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भारत के गेहूं-चावल से चिढ़ा अमेरिका, जवाब देंगे मोदी

नई दिल्‍ली। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि भारत ने गेहूं और चावल की सरकारी खरीद में सब्सिडी घटाकर दिखाई है। इस मसले को लेकर उसने भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शिकायत की है। आपको बता दें कि किसानों की फसल की उचित कीमत दिलाने के लिए सरकार हर साल गेहूं और चावल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करती है और इसी दर पर किसानों से गेहूं-चावल खरीदती है। अमेरिकी अधिकारियों को इसी MSP पर आपत्ति है। उनका दावा है कि एमएसपी के रूप में भारत सरकार जितनी सब्सिडी की घोषणा करती है, असल में उससे ज्‍यादा देती है। 

 

जवाब देने की तैयारी में मोदी सरकार  
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के इस कदम पर भारत की मोदी सरकार चुप नहीं बैठेगी। भारतीय अधिकारी WTO में इस मामले में जवाब देंगे। अंग्रेजी बिजनेस डेली इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स से एक अधिकारी ने कहा कि खेती को लेकर WTO के तहत हुए समझौते के तहत कोई भी देश अपने किसानों को सब्सिडी दे सकता है। अधिकारियों का दावा है कि अमेरिका का कैलकुलेशल पूरी तरह से गलत है। हम प्रोडक्‍शन और करंसी वैल्‍यू के आधार पर उनकी इस बात को चैलेंज करेंगे।  

 

क्‍या है अमेरिकी अधिकारियों का दावा ? 
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर और एग्रीकच्‍लर सेक्रेटरी सोनी परड्यू ने संयुक्त बयान में कहा कि अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ की खेती से संबंधित समिति के सामने भारत के मार्केट प्राइस सपोर्ट (MPS) पर काउंटर नोटिफिकेशन दिया है। अमेरिका ने 4 मई को यह नोटिफिकेशन दिया है। WTO समझौते के तहत पहली बार एक किसी अन्य देश के उपायों पर किसी देश ने कृषि संबंधी मसले पर जवाबी नोटिफिकेशन दिया है। अमेरिका का दावा है कि गेहूं प्रोडक्‍शन का 60 फीसदी से ज्‍यादा हिस्‍से पर जबकि चावल प्रोडक्‍शन के करीब 70 फीसदी से ज्‍यादा हिस्‍से पर भारत MPS दे रहा है। यह तय मानकों ने ज्‍यादा है। 

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