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भारत की चतुर चालाकी, अमेरिका-चीन के झगड़े में उठा लिया बड़ा फायदा

भारत ने 10 साल में पहली बार घाटे को कम करने में मिली मदद

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नई दिल्ली. भारत ने एक चतुर बनिया जैसी चालाकी दिखाते हुए अमेरिका-चीन के झगड़े में फायदा उठा लिया। वो भी बहुत ही प्रोफेशनल तरीके से। भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा पिछले 10 साल से चला आ रहा है। मतलब चीन ज्यादा मात्रा में भारत को वस्तुएं आयात करता था, जबकि भारत उस मात्र में चीन को प्रोडक्ट एक्सपोर्ट नहीं कर पाता था।

 

चीन को एक्सपोर्ट 31 प्रतिशत की वृद्धि

हालांकि पिछले कुछ वर्षों से इस ट्रेंड में बदलाव हुआ है। खासकर अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के बाद से चीन ने जरूरी वस्तुओं के निर्यात के लिए अमेरिका की बजाय भारत का रुख किया है। मौजूदा वक्त में भारत ने चीन के साथ अपने ट्रेड डेफिसिट (चालू खाता घाटा) को कम कर लिया है, जो कि करीब एक दशक के बाद संभव हो सका है। 31 मार्च को खत्म हुए वित्त वर्ष में भारत का चीन को एक्सपोर्ट 31 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 17 बिलियन डॉलर पहुंच गया। हालांकि अभी भी भारत और चीन के बीच करीब 53 बिलियन डॉलर है, जिसमें 10 बिलियन डॉलर की कटौती हुई है। 

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चीन को एक्पोर्ट होने वाली वस्तुएं

चीन ने अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के बाद भारत के लिए अपना बाजार खोला है। साथ ही नियमों को उदार बनाय है। इसके चलते भारत बासमती चावस और सोयाबीन तेल की चीन में बिक्री का रास्ता साफ हो सका है। साथ ही भारत से चीन को शुगर, अंगूर, रॉ कॉटन, फॉर्मास्यूटिकल, फिश मील, फिश ऑयल, मीट, तंबाकू और प्लास्टिक रॉ मैटेरियल का एक्सपोर्ट किया जा सका है। इनमें से सोयाबीन मील, अनार, केला और मकाई जैसे आइटम की फरवरी-अप्रैल माह के एक्पोर्ट में 346 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह लगातार दूसरा साल है, जब नई दिल्ली से चीन को भेजे जाने वाले शिपमेंट में लगातार दूसरे साल 30 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है। 

 

 

चीन से इम्पोर्ट में कमी 

भारत ने चीन से आयात में कमी की है। इसका नतीजा यह हुआ है कि पिछले साल भारत का राजकोषीय घाटा कम हुआ है, जो 76 बिलियन डॉलर से कम होकर 70 बिलियन डॉलर हो गया है। 

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