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इधर मोदी के मंत्री ने बनाया चौतरफा प्‍लान, भारत को और नहीं परेशान कर पाएंगे शेख

भारत सहि‍त कई अन्‍य मुल्‍क कच्‍चे तेल की कीमतों में जानबूझ कर की गई बढ़ोतरी की मार झेल रहे हैं।

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नई दि‍ल्‍ली। इधर भारत के प्रधानमंत्री चीन के साथ रि‍श्‍तों की नई इबारत लि‍ख रहे थे उधर उनके मंत्री भारत की एक बड़ी समस्‍या का हल नि‍कालने में जुटे थे। बरसों से भारत सहि‍त कई अन्‍य मुल्‍क कच्‍चे तेल की कीमतों में जानबूझ कर की गई बढ़ोतरी की मार झेल रहे हैं। प्रधानमंत्री की नसीहत के बावजूद इन देशों ने उसकी कीमत बढ़ा दी, जि‍सका बोझ आम जनता पर पड़ रहा है। खाड़ी देश बारबार भारत सहि‍त अन्‍य मुल्‍कों पर दबाव बनाते हैं। इस अड़ि‍यलपन को दुरुस्‍त करने के लि‍ए प्रधान ने एक चौतरफा प्‍लान तैयार कि‍या है, जि‍सका फायदा भारत की आम जनता को पहुंचेगा। 


क्‍या है माजरा
माजरा ये है कि‍ रूस सहि‍त पेट्रोल का निर्यात करने वाले ओपेक देशों ने 18 अप्रैल को यह फैसला लि‍या कि‍ वह तेल के उत्‍पादन में कटौती करेंगे। ऐसा करने से बाजार में तेल की कमी हो जाती है और उसके दाम बढ़ जाते हैं। सऊदी, यूएई सहि‍त अन्‍य कई खाड़ी देशों की आय का सबसे बड़ा जरि‍या तेल ही है। यह अपनी आय बढ़ाने के लि‍ए उत्‍पादन में जानबूझ कर कटौती करते हैं, इसका असर आप बाजार पर देख रही रहें होंगे। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 4 साल के हाई पर पहुंच गईं। 


भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्‍यादा तेल आयात करता है। फि‍लहाल हमारे पास कोई और चारा नहीं है। जैसे ही बाजार में कच्‍चे तेल की आवक कम होती है भाव बढ़ जाते हैं और भारत, चीन सहि‍त अन्‍य देशों को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। ये कीमत अरबों में होती है,जि‍सका बोझ जनता पर पड़ता है।  आगे पढ़ें क्‍या है धर्मेंद्र का प्‍लान 

क्‍या है प्रधान का प्‍लान 


कच्‍चे तेल की कीमतों को मनमाने ढंग से बढ़ाने का यह खेल बरसों से चला आ रहा है। अब भारत ने इससे नि‍पटने के लि‍ए रणनीति पर काम करना शुरू कर दि‍या है। जैसे तेल बेचने वाले देशों का एक गठजोड़ है उसी तरह से भारत तेल खरीदने वाले प्रमुख एशि‍याई देशों का भी एक गठजोड़ बनाना चाहता है, ताकि हम तेल बेचन वाले मुल्‍कों पर दबाव बना सकें। 
पेट्रोलि‍यम मि‍नि‍स्‍टर धर्मेंद प्रधान का कहना है कि इस तेल के खेल को सीमा में रखने के लि‍ए एशि‍या के 4  बड़े देशों को हाथ मि‍लाना चाहि‍ए। इसमें पहल भारत करेगा। प्रधान के प्‍लान के मुताबि‍क, चीन, जापान, दक्षि‍ण कोरि‍या और भारत को मि‍लकर ओपेक देशों पर दबाव बनाना चाहि‍ए ताकि वह कच्‍चे तेल की कीमतों को जानबूझकर न बढ़ाएं। 
उन्‍होंने कहा कि सरकार आम आदमी की तकलीफ को लेकर चिंति‍त है लेकि‍न हमें ग्राहकों के हि‍त और खजाने की जरूरत के बीच बैलेंस बनाने पर ध्‍यान देना होता है। तेल निर्यात करने वाले देशों के संगठन ने उत्‍पादन में कटौती की है। उधर ईरान और सीरि‍या की स्‍थि‍ति से भी कच्‍चे तेल के दाम और बढ़ गए हैं। 

 

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