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80:20 गोल्ड इंपोर्ट स्कीम के विरोध में था DRI, फिर भी चिदंबरम ने लगाई मुहर

PAC सब कमेटी का मानना है कि 80:20 गोल्‍ड अायात योजना से डीआरई सहमत नहीं था।

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नई दिल्ली. गोल्ड के इंपोर्ट के लिए 2013 में लॉन्च हुई 80:20 स्कीम पर डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) सहमत नहीं था। इसके बावजूद तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इसे मंजूरी दे दी थी। एक संसदीय समिति की जांच में यह खुलासा हुआ है। 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार इस योजना को लाई थी, उस वक्‍त चिदंबरम वित्‍त मंत्री थे। मौजूदा कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी इस योजना को लेकर चिदबंरम पर आरोप लगा चुके हैं।

 

 

हो सकती है सीबीआई जांच

सूत्रों के मुताबिक पब्लिक अकाउंट कमेटी (PAC) की उप समिति के अध्‍यक्ष और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश कर सकते  हैं। सब कमेटी यह जानना चाहती है कि आखिर किन हालात में यह सब हुआ।

 

डीआरआई को थी राउंड ट्रिपिंग की आशंका

सूत्रों के मुताबिक, DRI को आशंका थी कि इस योजना से गोल्‍ड के आयात के नाम पर राउंड ट्रिपिंग होने लगेगी। 2013 में यूपीए सरकार के समय में 80:20 गोल्‍ड आयात योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत गोल्‍ड आयातकों के लिए शर्त थी कि वह अगला निर्यात तभी कर सकते हैं जब पिछले अायात का 20 फीसदी निर्यात किया हो। भाजपा सरकार ने आते ही इस योजना को 2014 में खत्‍म कर दिया था।

 

रविशंकर भी लगा चुके हैं चिदंबरम पर आरोप

इस योजना के बारे में 5 मार्च को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम पर 2014 में 7 कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने जानना चाहा था कि किसके कहने पर लोकसभा चुनाव के नतीजों के दिन चिदंबरम ने 7 कंपनियों को 80-20 स्कीम के तहत गोल्‍ड आयात का फायदा दिया गया था। इनमें से एक कंपनी गीतांजलि जेम्स भी थी। बता दें कि इस कंपनी के मालिक मेहुल चौकसी पीएनबी फ्रॉड केस में मुख्य आरोपी हैं।

 

कांग्रेस की 80-20 स्कीम से कंपनियों को पहुंचा था फायदा

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा- "अगस्त 2013 में एक स्कीम थी 80-20। चिदंबरम और राहुल गांधी को बताना चाहिए कि 16 मई 2014 यानी लोकसभा चुनाव नतीजों के दिन 7 प्राइवेट कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ऑर्डर क्यों पास किया गया।"

 

 

राउंड ट्रिपिंग का आरोप

उन्‍होंने बताया - "यूपीए सरकार में करेंट अकाउंट डेफिसिटी बहुत गंभीर हो गया था। लोगों को गोल्ड को इम्पोर्ट करने का अवसर कम मिले, ताकि फॉरेन एक्सचेंज पर दबाव हो। इसलिए सिर्फ MMTC और पीएसयू को ही गोल्ड को इम्पोर्ट करने का अधिकार मिले। उसको बदलकर कहा गया कि कुछ प्राइवेट कंपनियों को भी इसका फायदा मिले। अब इस स्कीम में ऐसा था कि आप बाहर से सोना लाइए और उसको ज्वैलरी बनाकर एक्सपोर्ट करिए। उसमें सामने आया कि ज्वैलरी के नाम पर सिर्फ बड़ी-बड़ी सोने की चूड़ियां बनती थीं और बाहर चली जाती थीं। यानी राउंड ट्रिपिंग होती थी। इन्हें लग गया था कि अब सरकार जाने वाली है। इसलिए यह फैसला लिया गया। इनमें कंपनियों में गीतांजलि जेम्स भी शामिल थी।"

 

 

2013 में लॉन्च हुई थी 80-20 स्कीम

बता दें कि यूपीए ने अगस्त 2013 में एक स्कीम लॉन्च की थी 80-20। सरकार की कोशिश थी कि सोने के आयात पर रोक लगाई जा सके, ताकि करेन्ट अकाउंट डेफिसिट को संभाला जा सके। स्कीम के मुताबिक, प्राइवेट ट्रेडर्स को इम्पोर्टेड सोने का 20% एक्सपोर्ट करने की अनुमति दी गई थी। ये ट्रेडर्स बाकी बचे 80% सोने को देश के बाजार में बेच सकते थे। इस स्कीम को एनडीए सरकार ने 2014 में खत्म कर दिया था।

 

 

सारे एनपीए कांग्रेस की देन

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, “हम कई बार बता चुके हैं कि हमारी सरकार में एक भी ऐसा लोन नहीं दिया गया जो एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) हो। 2008 में बैंकों की ओर से लोगों को जो लोन दिया गया वो 18.06 लाख करोड़ था। यूपीए शासन के 6 साल में मार्च 2014 तक ये बढ़कर 52.15 लाख करोड़ हो गया।” तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री चिदंबरम पर निशाना साधते हुए प्रसाद ने कहा कि एक अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री थे और एक सुपर अर्थशास्त्री उनके वित्त मंत्री थे। इसके बावजूद हर किसी के हस्तक्षेप से बैंकिंग सिस्टम बुरी तरह उलझ गया।

 

 

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