जनधन अकाउंट में फंड लाने के लिए SBI की नई स्ट्रैटजी, इंसेंटिव मॉडल से आएगा पैसा

Banking Team

Oct 26,2015 05:05:00 PM IST
नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने लो बैलेंस वाले अकाउंट को प्रॉफिटेबल बनाने के लिए नई स्ट्रैटजी तैयार की है। इसके तहत बैंक ने कस्टमर सर्विस प्वाइंट के साथ हाथ मिलाकर इंसेंटिव मॉडल तैयार किया है, जहां टारगेट पूरा होने पर एक कस्टमर सर्विस प्वाइंट को 5000 रुपए तक का इंसेंटिव मिलेगा। एसबीआई ने इसके तहत नवंबर 2015 तक के टारगेट तय किए हैं। एसबीआई की यह स्ट्रैटजी नए खुलने वाले पेमेंट और स्मॉल बैंक को देखते हुए काफी अहम है।
क्या है स्ट्रैटजी
बैंक ने देशभर में अपने कस्टमर सर्विस प्वाइंट के लिए एक कैम्‍पेन शुरू किया है। इसके तहत नवंबर 2015 तक कस्टमर सर्विस प्वाइंट को 40 से 50 फीसदी की ग्रोथ हासिल करनी होगी। इसके तहत मिनिमम बैलेंस के आधार पर 5 तरह की कैटेगरी बनाई गई है। इसके तहत 400 रुपए से कम बैलेंस वाले अकाउंट को 500 रुपए के लेवल पर लाना है। इसी तरह 400-600 रुपए बैलेंस वाले अकाउंट में 800 रुपए का बैलेंस करना है। इसी तरह 1000 रुपए तक का टारगेट पूरा करना है।
5000 रुपए तक मिलेगा इंसेंटिव
बैंक ने कस्टमर सर्विस प्वाइंट को नवंबर 2015 तक 40-50 फीसदी ग्रोथ का टारगेट दिया है। इसके तहत टारगेट पूरा करने वाले कस्टमर सर्विस प्वाइंट को 3000 रुपए से लेकर 5000 रुपए का इंसेंटिव मिलेगा। साथ ही टारगेट समय से एक महीना पहले पूरा करने पर एडिशनल इंसेंटिव दिया जाएगा।
आगे की स्लाइड में पढ़िए किन बैंकों ने बढ़ाया है एसबीआई का टेंशन...
पेमेंट और स्मॉल बैंक ने बढ़ाई टेंशन एसबीआई की यह स्ट्रैटजी आने वाले दिनों में खुलने वाले 21 स्मॉल और पेमेंट बैंक को देखते हुए भी अहम है। बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार नए बैंक अगले डेढ़ से दो साल में खुल जाएंगे। जिनका ज्यादातर फोकस कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों पर होगा। एसबीआई के 2.03 करोड़ जनधन अकाउंट में जीरो बैंलेंस जनवरी 2015 तक था। इसे देखते हुए बैंक इन अकाउंट को मोबलाइज कर अपने लिए प्रॉफिटेबल बनाना चाहता है। आने वाले समय में नए बैंकों के कंप्टीशन को देखते हुए यह कदम फायदेमंद हो सकता है। दूसरे बैंकों पर भी बढ़ा दबाव एसबीआई की तरह दूसरे बैंकों पर भी जीरो बैलेंस अकाउंट को प्रॉफिटेबल बनाने का दबाव बढ़ा है। ऐसा इसलिए है कि एक जनधन अकाउंट खोलने पर बैंकों का करीब 140 रुपए खर्च होता है। ऐसे में जीरो बैंलेस अकाउंट उनके लिए न केवल घाटे का सौदा हो सकता है। बल्कि नए बैंक खुलने पर ज्यादा इंटरेस्ट रेट के ऑफर्स से कस्टमर भी खोने का डर है।
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