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बैंक एसेट रेशियो को 7.75 फीसदी से नीचे लाएं, आरबीआई ने कहा- नहीं तो करेगा कार्रवाई

बैंक एसेट रेशियो को 7.75 फीसदी से नीचे लाएं, आरबीआई ने कहा- नहीं तो करेगा कार्रवाई
नई दिल्‍ली।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों के खिलाफ नियामक कार्रवाई करने के नियमों को संशोधित किया है। संशोधित नियमों के मुताबिक जो बैंक कैपिटल-टू-रिस्‍क एसेट्स रेशियो को 7.75 फीसदी से नीचे नहीं रख पाएंगे, उनके खिलाफ नियामक कार्रवाई की जाएगी। आरबीआई ने गुरुवार को इस संबंध में सूचना जारी की। गंभीर मामलों में ऐसे बैंकों को मर्जर और बंद किए जाने जैसे गंभीर परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं।
 
आरबीआई ने साफ किया अपना रुख
आरबीआई ने गुरुवार को कहा कि जो बैंक बैड लोन्‍स की लिमिट को भी पार कर जाएंगे और जो कैपिटल रेशियो की शर्तों को पूरा करने में नाकामयाब रहेंगे, उनके के खिलाफ नियामक कार्रवाई की जाएगी। सेंट्रल बैंक की तरफ से किए गए ये बदलाव शीघ्र सुधार कार्रवाई प्रारूप के तहत किए गए हैं।
 
बैंकों के लिए तय है थ्रेसहोल्‍ड लिमिट
शीघ्र सुधार कार्रवाईशीप्रारूप 2002 में लाया गया था। इसमें बैंकों के लिए एक थ्रेसहोल्‍ड लीमिट तय की गई है। जब भी कोई बैंक इस लिमिट को पार कर लेते हैं, तो आरबीआई उनके खिलाफ पर्यवेक्षी कार्रवाई करता है। कार्रवाई में डेविडेंड वितरण पर रोक लगाना भी शामिल होता है।
 
आरबीआई कर सकता है कड़ी कार्रवाई
गंभीर मामलों में यह प्रारूप आरबीआई को अधिकार देता है कि वह उन करदाताओं का मर्जर करा दे या उन्‍हें बंद कर दे, जो नियमों के मुताबिक नहीं चल रहे। आरबीआई ने बयान जारी कर कहा कि अगर रेशियो 3.625 फीसदी से नीचे जाता है, तो उस बैंक का मर्जर करने और उसे बंद करने पर भी विचार किया जा सकता है।
 
6 फीसदी को पार न करे बैड लोन का रेशियो
बैड लोन रेशियो पर बोलते हुए आरबीआई ने कहा कि अगर किसी बैंक का नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स रेशियो 6 फीसदी को पार करता है, तो पहला थ्रेसहोलड उसके खिलाफ लागू किया जाएगा। अगर नेट बैड लोन रेशियो 12 फीसदी से ज्‍यादा हुआ, तो यह बैंक को बंद करने और उसके मर्जर के लिए रास्‍ता तय कर सकता है। 

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