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मनी भास्कर खास /अप्रैल, 2009 के बाद सबसे कम स्तर पर पहुंचा आरबीआई का रेपो रेट

  • शुक्रवार को आरबीआई ने अपने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है
  • रेपो रेट 5.15 फीसदी हो गया है, अप्रैल 2009 में रेपो रेट 4.25 फीसदी था

प्रतिभा सिंह

Oct 04,2019 03:58:59 PM IST

नई दिल्ली. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को मौद्रिक समिति की बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइंट घटा दिया। इसके बाद रेपो रेट 5.15 फीसदी हो गया है। यह रेपाे रेट अप्रैल, 2009 के बाद सबसे कम है। अप्रैल, 2009 में रिजर्व बैंक का रेपो रेट 4.25 फीसदी था। गिरती हुई अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिए और लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए आरबीआई ने लगातार पांचवीं बार रेपो दर में कटौती की है।

अगस्त, 2000 में रेपो रेट अब तक के सर्वोच्च स्तर पर

ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2000 में अगस्त माह में आरबीआई का रेपो रेट 14.50 फीसदी था, जो कि अब तक का सबसे ऊंचा रेट है। 2000 से 2019 तक रेपो रेट का औसत 6.63 फीसदी रहा है। अप्रैल, 2009 में रेपो रेट अब तक का सबसे कम 4.25 फीसदी था। रिवर्स रेपो रेट भी अगस्त, 2000 में 13.50 फीसदी के साथ सबसे ऊपर और 3.25 फीसदी के साथ अप्रैल, 2009 में सबसे निचले स्तर पर था। अगस्त, 2019 में रिवर्स रेपो रेट 5.15 फीसदी था।

क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट

जिस दर पर कमर्शियल बैंक रिजर्व बैंक से पैसा उधार लेते हैं, उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट जितना ज्यादा होगा, उतने अधिक रेट पर बैंक ग्राहकों को ऋण देंगे। इसलिए रेपो रेट का कम होना लोगों के लिए फायदेमंद होता है। रिवर्स रेपो रेट वह होता है जिस पर रिजर्व बैंक कमर्शियल बैंकों को उनकी जमा पर ब्याज का भुगतान करता है। रिवर्स रेपो रेट बढ़ने का मतलब यह है कि बैंक अधिक मुनाफा पाने के लिए अपना ज्यादा से ज्यादा धन आरबीआई के पास जमा कराएंगे, जिससे मार्केट में पैसे की कमी हो सकती है। लिहाजा बाजार में धन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रिवर्स रेपो रेट को मॉनीटरी पॉलिसी इंस्ट्रूमेंट की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

लोन पर देना होगा कम ब्याज

आरबीआई की ओर से रेपो रेट में कटौती से आम लोगों को भी फायदा होगा। इस समय भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) समेत अधिकांश बैंकों ने अपने होम, ऑटो समेत सभी प्रकार के लोन को रेपो रेट से जोड़ दिया है। ऐसे में आरबीआई की ओर से रेपो रेट में कटौती के बाद बैंकों की ओर से दिए जा रहे लोन पर भी ब्याज की दरें कम हो जाएंगी। इससे लोगों को लोन पर कम ब्याज देनी पड़ेगी और उनका ईएमआई का बोझ घटेगा।

जीडीपी विकास दर का अनुमान भी घटाया

न सिर्फ रिजर्व बैंक ने अक्टूबर-नवंबर माह के लिए रेपो दर में कटौती की है, बल्कि मौजूदा वित्त वर्ष के लिए जीडीपी पूर्वानुमान भी घटाकर 6.1 फीसदी कर दिया है। पिछली समीक्षा में आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के विकास अनुमान को 7.1 फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी पर रख दिया था।

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