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RBI ने दिया होलसेल, लॉन्‍ग टर्म फाइनेंस बैंक बनाने का प्रस्‍ताव, करेंगे इंफ्रा और कॉरपोरेट फंडिंग

RBI ने दिया होलसेल, लॉन्‍ग टर्म फाइनेंस बैंक बनाने का प्रस्‍ताव, करेंगे इंफ्रा और कॉरपोरेट फंडिंग
 
नई दिल्‍ली।रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक नया होलसेल और लॉन्‍ग टर्म फाइनेंस (WLTF) बैंक बनाने का प्रस्‍ताव दिया है। इन बैंक्‍स का मकसद लंबे समय के हाई वैल्‍यू प्रोजेक्‍ट्स के लिए फंड मुहैया करना होगा। ये बैंक डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्‍टीट्यूशन (DFIs) की तर्ज पर काम करेंगे।  
 
WLTF बैंक बनाने के लिए तैयार एक ड्रॉफ्ट डिस्‍कशन पेपर में RBI ने कहा कि देश के मौजूदा बैंकिंग एंड नॉन बैंकिंग सेक्‍टर को देखते हुए एक अलग तरह के बैंकों की जरूरत महसूस हो रही है, जो विकास को गति देने के लिए फाइनें‍शियल सेक्‍टर को और मजबूत बना सकें।   
 
इस तरह के बैंक के लिए मिनिमम 1,000 करोड़ रुपए की पूंजी की जरूरत होगी। ये बैंक इंफ्रा सेक्‍टर और कॉरपोरेट बिजनेस के लिए फंड मुहैया कराएंगे।  इस बैंकों को बुनियादी फोकस इंफ्रास्‍टक्‍चर के साथ स्‍मॉल, मीडियनम और कॉरपोरेट बिजनेस के लिए लोन देना होगा। साथ ही ये प्राइमरी सेक्‍टर से सीधे जुड़े हुए फाइनेंशियल इंस्‍टीट्यूशंस और बैंकों के लिए फंड भी जुटाएंगे।
 
मौजूदा समय में कड़े बैंकिंग नियमों को देखते हुए इसे एक बेहतर इनिशिएटिव माना जा सकता है, क्‍योंकि अभी तक इंडस्ट्रियल हाउस और कॉरपोरेट ग्रुप को फुल कॉमर्शियल बैंक चलाने की इजाजत नहीं है।
 
आरबीआई के मुताबिक, इन बैकों को सेविंग डिपॉजिट स्‍वीकार करने की मनाही होगी। सिर्फ करंट आकाउंट और टर्म डिपॉजिट पर 10 करोड़ रुपए स्‍वीकार करने की इजाजत होगी। साथ ही समय से पहले पैसा निकालने की भी मनाही होगी। इसके अलावा बैंकों को देश विदेश में बॉंन्‍ड इश्‍यू करने की भी इजाजात होगी।  
 
यही नही बैंक को सिर्फ सीआरआर की मेंटन रखना होगा, उसे एसएलआर मेंटेन रखने से छूट होगी। साथ ही लिक्विडिटी रिस्‍क और लिक्विडिटी से जुड़े नियमों को लागू करने में भी ढील मिलेगी। 

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