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रेपो रेट /कल आरबीआई फिर से कर सकता है ब्याज दर में कटौती

  • लोन की दरें और कम करने के लिए हो सकता है फैसला
  • सरकार अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए ब्याज दरों में कटौती चाहती है

Moneybhaskar.com

Oct 03,2019 01:10:27 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एक बार फिर शुक्रवार को अपनी दरों में कटौती का ऐलान कर सकता है। सरकार की तरफ से अर्थव्यवस्था में अधिक से अधिक नकदी मुहैया कराने की कोशिश को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है। मुद्रास्फीति के नियंत्रण में रहने की वजह से भी ऐसी संभावना जाहिर की जा रही है। शुक्रवार को आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा बैठक है। इस साल अब तक चार बार आरबीआई अपनी दरों में कटौती कर चुका है। कल फिर से दरों में कमी लाए जाने पर यह पांचवीं कटौती होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक शुक्रवार को आरबीआई अपने रेपो रेट में 25 आधार अंक की कटौती कर सकता है। इस साल अगस्त में आरबीआई ने रेपो रेट में 35 आधार अंक की कटौती की थी। रेपो रेट पर ही आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। बैंकों को मिलने वाले कर्ज की दर कम होने से आम उपभोक्ताओं को बैंकों से मिलने वाले कर्ज की ब्याज दरों में कटौती करने की बैंकों के पास पूरी गुंजाइश रहती है। आम लोगों को सस्ती दरों पर लोन मिलने हर क्षेत्र में मांग निकलती है।

रेपो रेट में कटौती से बढ़ेगा निवेश और खपत

नरेडको के प्रेसिडेंट और हीरानंदानी ग्रुप के सीएमडी निरंजन हीरानंदानी के मुताबिक फिलहाल आरबीआई सिर्फ महंगाई दरों को काबू में रखने के लिए प्रयास नहीं कर रहा है बल्कि अर्थव्यवस्था के विकास में तेजी लाने के लिए भी प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि हम रेपो रेट में 0.50 आधार अंक की कटौती की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि महंगाई दर 3.2 की संभावित दरों से नीचे चल रही है। रेपो रेट में और कटौती से सिर्फ लोन की दरें कम नहीं होंगी बल्कि निवेश एवं खपत में भी इजाफा होगा। वहीं बाजार में नकदी की बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि नए होम लोन को रेपो रेट से लिंक करने के बाद रेपो रेट में कटौती होने पर मकान खरीदार को काफी राहत मिलेगी और मकान की मांग में बढ़ोतरी दर्ज होगी।

40 आधार अंक तक की कर सकता है कटौती

यस बैंक के अर्थशास्त्री युविका ओबरॉय के मुताबिक अगर वर्तमान की मुद्रास्फीति की दर नरम बनी रहती है तो अर्थव्यवस्था के विकास में मदद के तौर पर आरबीआई 40 आधार अंक तक की कटौती कर सकता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आगामी दिसंबर में भी आरबीआई रेपो रेट में कटौती कर सकता है। अर्थव्यवस्था की विकास दर जून तिमाही में 5 फीसदी पर आ गई है जो 2013 से लेकर अब तक की सबसे धीमी रफ्तार है।

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