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बड़ी डिफॉल्टर कंपनियों का प्रबंधन हाथ में लें बैंकः RBI

Personal finance

Jun 08,2015 08:33:00 PM IST
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने लाखों करोड़ रुपये की गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) की समस्या से निपटने के लिए बड़ी पहल की। आरबीआई ने सोमवार को बैंकों को मुश्किल में पड़ी संपत्तियों या कंपनियों के कर्ज को इक्विटी में तब्दील करके उनका प्रबंधन हाथ में लेने का विकल्प दिया है।
7-10 लाख करोड़ की संपत्तियां मुश्किल में
केंद्रीय बैंक ने एक नई स्ट्रैटेजिक डेट रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम (एसडीआर) की शुरुआत करते बैंकों से एनपीए में फंसी संपत्तियों पर कड़ा रुख अपनाने के लिए कहा। अनुमान है कि फिलहाल 7 लाख करोड़ से 10 लाख करोड़ रुपए के बीच संपत्तियां मुश्किल में फंसी हुई हैं। ऐसी संपत्तियों की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यह भारत सरकार के सालाना बजट का लगभग 60 फीसदी के बराबर है।
आरबीआई ने सभी व्यावसायिक बैंकों, एक्जिम बैंक, नाबार्ड, नेशनल हाउसिंग बैंक और सिडबी को भेजे एक सर्कुलर में कहा कि ऋणदाताओं को प्रवर्तकों के ऋण पुनर्गठन के नाम पर किए जाने वाले खेल से सतर्क रहना चाहिए।
प्रबंधन का नियंत्रण ऋणदाताओं के पक्ष में हो
आरबीआई ने बैंकों को कंपनी के पटरी पर (मुनाफे में) आने तक प्रवर्तकों द्वारा एनपीए के एवज में बैंकों को इक्विटी का हस्तांतरण, प्रवर्तकों द्वारा अपनी कंपनी में पूंजी लगाने और प्रवर्तकों की होल्डिंग को एक सिक्युरिटी ट्रस्टी या एक एस्क्रो खाते में हस्तांतरण के तीन विकल्प दिए। इससे प्रबंधन के नियंत्रण में बदलाव होगा, जो ऋणदाताओं के पक्ष में होना चाहिए।
कर्ज के इक्विटी में तब्दील होने के बाद बैंकरों के कंसोर्टियम या संयुक्त ऋणदाता फोरम के पास संयुक्त रूप से कंपनी के 51 फीसदी हिस्सेदारी या इक्विटी शेयर होने चाहिए। इस तरह की पूरी कवायद समयबद्ध होनी चाहिए और एसडीआर पैकेज की मंजूरी की तारीख के 90 दिनों के भीतर होनी चाहिए।
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