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    सरकारी बैंकों को मिलेगा 10 हजार करोड़, चेक डिफॉल्ट के लिए बनेगा कानून

    सरकारी बैंकों को मिलेगा 10 हजार करोड़, चेक डिफॉल्ट के लिए बनेगा कानून
    नई दिल्ली। साल 2017-18 के बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैंकों के लिए हर साल की तुलना में कम कैपिटल इन्फ्यूजन करने के साथ डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के कई एलान किए हैं। आइए जानते हैं कि बैंकों के लिए क्या प्रमुख एलान किए गए हैं.
     
    10 हजार करोड़ का कैपिटल इन्फ्यूजन
     
    सरकार ने साल 2017-18 के लिए पब्लिक सेक्टर बैंकों को 10 हजार करोड़ रुपए की कैपिटल इन्फ्यूजन करने का एलान किया है। हर साल बैंकों को कैपिटल इन्फ्यूजन करती है। जिसके जरिए उनके लिए बेसल-3 मानकों को पूरा करना आसान हो सकेगा।
     
    चेक डिफॉल्ट के लिए बनेगा कानून
     
    इसी तरह डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार मौजूदा निगोशिएबल इन्स्ट्रूमेंट एक्ट में बदलाव भी करेगी। इसके लिए जेटली ने कहा है कि ऐसे प्रावधान किए जाएंगे। जिससे चेक डिफॉल्ट होने पर चेक पाने वालों को पेमेंट मिल सके। अभी कई बार ऐसा होता है कि चेक पेमेंट के बावजूद अकाउंट में पैसा नहीं पहुंचता है। इसकी वजह चेक का डिफॉल्ट होना रहता है। जिस कारण कई बिजनेसमैन या आम आदमी चेक से पेमेंट स्वीकार नहीं करते। नए प्रावधान में ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि चेक डिफॉल्ट होने पर पेमेंट मिलना आसान हो सके।
     
    बनेगा पेमेंट रेग्युलेटरी बोर्ड
     
    इसी तरह डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायूड की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने एक पेमेंट रेग्युलेटरी बोर्ड बनाने की सिफारिश की थी। जिसे सरकार द्वारा मान लिया गया है। इसके तहत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की अंडर में एक पेमेंट रेग्युलेटरी बोर्ड का गठन किया जाएगा। जो कि डिजिटल पेमेंट और ट्रांजैक्शन से जुड़े मुद्दों को देखेगा। इसके अलावा फाइनेंशियल इनक्लूजन फंड को मजबूत करने की भी बात जेटली ने बजट भाषण में कही है।

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