लोकसभा /5 साल में विलफुल डिफॉल्टर्स की संख्या 60% बढ़ी, 8582 तक पहुंचा आंकड़ा

  • विलफुल डिफॉल्टर ऐसी एंटिटी या व्यक्ति को कहा जाता है, जिसने पैसा देने में सक्षम होने के बावजूद कर्ज नहीं चुकाया है

Moneybhaskar.com

Jun 24,2019 07:52:07 PM IST

नई दिल्ली. सरकारी बैंकों में बीते 5 साल के दौरान विलफुलडिफॉल्टर्स की संख्या 60 फीसदी बढ़कर 8,582 तक पहुंच गई है। सरकार ने लोकसभा में दी गई जानकारी में कहा कि वित्त वर्ष 2014-15 के अंत तक यह आंकड़ा 5,349 था। विलफुल डिफॉल्टर ऐसी एंटिटी या व्यक्ति को कहा जाता है, जिसने पैसा देने में सक्षम होने के बावजूद कर्ज नहीं चुकाया है।

तेजी से बढ़े विलफुल डिफॉल्टर्स के मामले

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक सवाल के जवाब में कहा कि बीते 5 साल के दौरान बैंकों के विलफुल डिफॉल्टर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। यह संख्या 2014-15 से बढ़ रही है। यह आंकड़ा 2015-16 में 6575, 2016-17 में 7079 और 2017-18 यह 7535 के स्तर पर पहुंच गया।

7654 करोड़ रुपए की हुई रिकवरी

सीतारमण ने कहा, ‘विलफुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की गई है। आरबीआई के दिशानिर्देशों के तहत विलफुल डिफॉल्टर्स को बैंकों या वित्तीय संस्थानों द्वारा कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं दी जाती है। उनकी यूनिट को नए वेंचर्स की स्थापना के लिए 5 साल के वास्ते प्रतिबंधित कर दिया जाता है।’
उन्होंने कहा कि बीते 5 वित्त वर्ष के दौरान विलफुल डिफॉल्टर्स के खातों से 7654 करोड़ रुपए की रिकवरी हो चुकी है।

6251 केस में सरफेशी एक्ट के तहत शुरू हुई कार्रवाई

सरकारी बैंकों से मिले डाटा के मुताबिक, 31 मार्च 2019 तक 8,121 मामलों में रिकवरी के लिए मुकदमे दायर किए जा चुके हैं। सिक्योर्ड एसेट्स के मामले में 6251 केस में सरफेशी एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। भारत में 17 सरकारी यानी नेशनलाइज्ड बैंक हैं।

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