Home » Economy » Bankingइस्लामिक बैंकिंग भारत में लाने का कोई इरादा नहीं: अब्बास नकवी

भारत एक सेकुलर देश है, इस्‍लामिक बैंकिंग लाने का कोई इरादा नहीं: नकवी

इस्‍लामिक या शरिया बैंकिंग फाइनेंस का एक ऐसा सिस्‍टम है जिसमें ब्‍याज नहीं लिया जाता है।

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हैदराबाद. केंद्रीय मंत्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने कहा है कि लोगों की फाइनेंशियल जरूरतों के लिए देश में अलग-अलग बैंकों का बड़ा नेटवर्क है। इसलिए इस्‍लामिक बैंकिंग लाने के बारे में विचार करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है। इस्‍लामिक या शरिया बैंकिंग फाइनेंस का एक ऐसा सिस्‍टम है जिसमें ब्‍याज नहीं लिया जाता है।

 

भारत एक सेकुलर और डेमोक्रेटिक देश

अल्‍पसंख्‍यक मामलों के मंत्री नकवी ने रविवार को यहां कहा कि सरकार भारत में इस्‍‍लामिक बैंकिंग की अनुमति नहीं देगी क्‍योंकि भारत एक सेकुलर और डेमोक्रेटिक देश है। उन्‍होंने कहा कि यहां कई सरकारी और शेड्यूल्‍ड बैंक हैं और मौजूदा बैंकिंग सिस्‍टम सभी के लिए उपलब्‍ध है। इसलिए सरकार इस्‍लामिक बैंकिंग के कॉन्‍सेप्‍ट को लाने के बारे में नहीं सोच रही है। कुछ संगठनों और लोगों ने इस मसले पर सुझाव दिए थे लेकिन हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं है।

 

सरकार सभी अहम मसलों पर बहस को तैयार

संसद के शीतकालीन सत्र के बारे में नकवी ने कहा कि सरकार सभी महत्‍वपूर्ण मसलों पर बहस के लिए तैयार है। विपक्ष से भी यह उम्‍मीद करती है कि वह संसद के दोनों सदनों को सुचारू रूप से चलाने में सपोर्ट करे। उन्‍होंने कहा कि संसद बहस करने और फैसले लेने के लिए है। ऐसे में यदि कोई सदन की कार्यवाही में केवल बाधा उत्‍पन्‍न करता है तो यह संसद की मर्यादा के खिलाफ होगा।

 

RBI भी है शरिया बैंकिंग के खिलाफ

​रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भी फैसला किया है कि वह देश में इस्‍लामिक बैंकिंग यानी शरिया बैंकिंग के प्रपोजल को आगे नहीं बढ़ाएगा। पिछले दिनों एक RTI का जवाब देते हुए RBI ने कहा था कि उसने यह फैसला देश में बैंकिंग व फाइनेंशियल सर्विसेज को एक्‍सेस करने के लिए सभी नागरिकों के पास मौजूद समान अवसरों पर विचार करने के बाद लिया। बता दें, इस्‍लामिक या शरिया बैंकिंग इंट्रेस्ट फ्री नियमों पर बेस्ड फाइनेंस सिस्‍टम है। बता दें कि इस्‍लाम में इंट्रेस्ट लेना प्रतिबंधित है।  

 

2008 में उठा था शरिया बैंकिंग का मुद्दा

RTI में RBI से शरिया बैंकिंग को शुरू करने के मामले में उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी देने को कहा गया था। 2008 के आखिर में फाइनेंशियल सेक्‍टर रिफॉर्म्‍स पर बनी कमेटी ने देश में इंट्रेस्‍ट फ्री बैंकिंग के मुद्दे पर विचार करने पर जोर दिया था। इस कमेटी के अध्‍यक्ष पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन थे। कमेटी ने कहा था कि कुछ धर्म ब्याज लेने-देने वाले फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स के इस्तेमाल को नाजायज ठहराते हैं। इंट्रेस्ट फ्री बैंकिंग प्रॉडक्ट्स नहीं होने की वजह से कुछ भारतीय धर्म के कारण बैंकिंग प्रॉडक्ट्स और सर्विसेज का इस्तेमाल नहीं करते हैं। इनमें समाज का इकोनॉमिकली बैकवर्ड तबका शामिल है।

 

शरिया बैंकिंग धीरे-धीरे शुरू करने की थी सिफारिश

- RBI ने पिछले साल फरवरी में IDG की रिपोर्ट की कॉपी फाइनेंस मिनिस्ट्री को भेजी थी। इसमें सिफारिश की गई थी कि देश में शरिया बैंकिंग शुरू करने के लिए ट्रेडिशनल बैंकों में एक इस्‍लामिक विंडो शुरू की जाए।

- RBI ने कहा था, "हमें लगता है कि इस्‍लामिक फाइनेंस, कई नियमों और कई तरह की सुपरवायजरी चुनौतियों, साथ ही इंडियन बैंकों को एक्सपीरिएंस नहीं होने के चलते देश में इस्‍लामिक बैंकिंग धीरे-धीरे शुरू की जानी चाहिए। सरकार के जरूरी नोटिफिकेशन जारी करने के बाद शुरुआत में कंन्वेंशनल बैंकिंग प्रॉडक्‍ट्स जैसे सिम्पल प्रोडक्ट्स को इंट्रड्यूस किया जा सकता है।

 

क्‍यों की थी अलग विंडो की बात ?

- RBI ने कहा गया था- हमें लगता है कि फाइनेंशियल इनक्लूजन के लिए इंट्रेस्ट फ्री बैंकिंग में प्रॉडक्ट्स को शरिया नियमों के तहत प्रमाणित करने की सही प्रॉसेस अपनाने की जरूरत होगी। इसमें असेट और लोन, दोनों शामिल होंगे। इस बैंकिंग से मिलने वाले फंड को दूसरे फंड्स के साथ मिलाया नहीं जा सकेगा। ऐसे में इंट्रेस्ट फ्री बैंकिग के लिए एक अलग विंडो की जरूरत होगी।

 
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