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गुजरात-हिमाचल चुनाव के बाद बैंकों के मर्जर का आ सकता है रोडमैप, 1 अप्रैल तय हुई डेडलाइन

सभी पब्लिक सेक्टर बैंकों के प्रमुखों की अगले हफ्ते फाइनेंस मिनिस्ट्री ने बैठक बुलाई है।

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नई दिल्ली. मोदी सरकार गुजरात-हिमाचल चुनावों के बाद पब्लिक सेक्टर बैंकों के मर्जर का रोडमैप पेश कर सकती है। जिसके जरिए 31 मार्च तक नए बैंकों का स्वरूप सामने आ सके। इसके लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री ने बैंकों के प्रमुखों के साथ अगले हफ्ते में बैठक बुलाई है।
 
5-6 बड़े बैंक बनाना चाहती है सरकार
बैंकिंग इंडस्ट्री से जुड़े सूत्र के अनुसार सभी पब्लिक सेक्टर बैंकों के प्रमुखों की अगले हफ्ते फाइनेंस मिनिस्ट्री ने बैठक बुलाई है। जिसमें बैंकों के मर्जर प्लान के रोडमैप पर चर्चा होगी। सरकार गुजरात और हिमाचल चुनाव के बाद बैंकों के मर्जर प्लान का ऐलान कर सकती है। उसकी कोशिश है कि अगले फाइनेंशियल ईयर यानी एक अप्रैल 2018 से नए बैंकों का स्वरूप सामने आ सके।
 
2.1 लाख करोड़ रुपए फंड देने का किया है ऐलान
इसके लिए मोदी सरकार ने 2.1 लाख करोड़ रुपए की पूंजी सहायता बैंकों को दो साल में देने का ऐलान किया है। सूत्रों के अनुसार फाइनेंस मिनिस्ट्री का मानना है कि यह पूंजी देने से पहले बैंकों के मर्जर का रोडमैप तैयार किया जा सके। जिससे कि फंड डिस्ट्रिब्यूशन का प्लान तैयार हो सके। फाइनेंस मिनिस्ट्री इस मामले में बैंकों की परफॉर्मेंस के आधार पर फंड देने की तैयारी में है। यानी खराब परफॉर्म करने वाले बैंकों को फंड देने से पहले चरण में दूर रखा जाय।
 
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के मर्जर का भी प्रपोजल
बैंक कर्मचारी इतनी जल्दी में मर्जर करने का विरोध कर रहे हैं। उनके अनुसार सरकार को सभी स्टेकहोल्डर से बात कर बैंकों के मर्जर का रोडमैप पेश करना चाहिए। साथ ही क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को मिलकार एक ऱाष्ट्रीय ग्रामीण बैंक बनाने का भी प्रपोजल कर्मचारियों ने दिया है। उनके अनुसार देश में 56 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की 22 हजार ब्रांचेज और 80 हजार कर्मचारी हैं। इनका यूज बड़ा बैंक बनाकर किया जा सकता है।
 
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