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सुझाव /बैंक डिफाल्टरों के चुनाव लड़ने पर लगे रोक, बैंक वर्कर्स एसोसिएशन की मांग

  • इस वर्ष के दौरान कुछ राज्य विधानसभा चुनाव होने हैं

Moneybhaskar.com

Sep 28,2019 03:52:00 PM IST

नई दिल्ली: भारतीय मजदूर संघ के औद्योगिक महासंघ की दिल्ली इकाई, दिल्ली प्रदेश बैंक वर्कर्स आर्गेनाइजेशन ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर बैंकर्स की प्रमुख विषय की चिंता से अवगत कराया है। चूंकि 17 वीं लोकसभा के आम चुनाव खत्म हो चुके हैं और इस वर्ष के दौरान कुछ राज्य विधानसभा चुनाव होने हैं। इस संबंध में हम निम्नलिखित दो प्रमुख सुझाव / अपील, जो सभी बैंकों के लिए अत्यधिक महत्व के हैं आपके ध्यान में लाते हैं : -

  1. जब बैंक किसी भी सामान्य व्यक्ति को ऋण देता हैं तो CIBIL स्कोर रिपोर्ट की मांग की जाती है, जो उस व्यक्ति की ऋण योग्यता को इंगित करती है और यदि किसी सामान्य व्यक्ति को बैंक से ऋण लेना है तो केवल इस सत्यापन के बाद ही बैंक किसी व्यक्ति का ऋण स्वीकृत करता है। हमारा सुझाव है की चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों को अपने बैंकर से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्रस्तुत करना अनिवार्य किया जाना चाहिए कि उनके और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा बैंकों का कोई बकाया / डिफॉल्ट नहीं है। नामांकन के लिए उम्मीदवारों को लंबित आपराधिक मामलों, चल और अचल संपत्तियों सहित विदेशी संपत्ति, देनदारियों, आय के स्रोत और पानी के बिल, बिजली का बिल और घर का किराया का कोई बकाया नहीं जैसे कुछ विवरण प्रस्तुत करने होते हैं
  2. इसलिए हमारा आपसे अनुरोध हैं कि आने वाले चुनावों में उम्मीदवारों द्वारा दायर किए जाने वाले चुनाव हलफनामे में एक अनिवार्य शर्त को जोड़ा जाना चाहिए कि उसका या उसके परिवार का बैंक का कोई बकाया/ डिफॉल्ट नहीं है और इस सन्दर्भ में "उम्मीदवार अपने बैंकर से अनापत्ति प्रमाण (NOC) पत्र प्रस्तुत करें । इस तरह से बैंकों के डिफाल्टर चुनाव नहीं लड़ सकेंगे और कोई भी वास्तव में चुनाव लड़ना चाहता है तो बैंक से अपने बकाये का एनओसी लाएगा।
  3. चुनाव अभियान के दौरान राजनीतिक दल के नेता अक्सर यह कहते हुए बयान देते हैं कि "यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो किसानों के ऋण माफ कर दिए जाएंगे"। ये बयान न केवल किसानों को भ्रमित करते हैं बल्कि बैंकिंग क्षेत्र के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को भी बड़ी क्षति पहुंचाते हैं। यह देखा गया है कि जो किसान ऋण चुकाने की पर्याप्त क्षमता रखते हैं, वे भी राजनीतिक दल के नेताओं द्वारा ऋण माफी की प्रतिबद्धता की आशा में भुगतान नहीं करते हैं। आप इस बात से अवगत हैं कि बैंक पहले से ही बढ़ते एनपीए के बड़े संकट का सामना कर रहे हैं और समाज को जरूरतमंद तबके को नया ऋण प्रदान करने के लिए स्वस्थ बैंकों की आवश्यकता है। इसलिए, राजनीतिक दल के नेताओं द्वारा इस तरह के ऋण माफी बयान मौजूदा समस्या को बढ़ा देते हैं। इसलिए हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप सभी राजनीतिक दलों को ऋण माफ करने के लिए कोई भी बयान देने से परहेज करने के लिए सलाह दें।
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