Home » Economy » BankingUp to 50 percent of government owned banks may be closed

सरकारी बैंकों की 50% तक ब्रांच हो सकती है बंद, घाटा कम करने के लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री का है प्लान

सरकारी बैंकों की 50 फीसदी ब्रांच सरकार धीरे-धीरे बंद कर सकती है।

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नई दिल्ली। सरकारी बैंकों की 50 फीसदी ब्रांच सरकार धीरे-धीरे बंद कर सकती है। जिसका सबसे ज्यादा असर छोटी ब्रांच और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों पर पड़ सकता है। फाइनेंस मिनिस्ट्री प्रॉफिट नहीं देने वाली ब्रांच को बंद करना चाहती है। जिसमें देश में काम कर रही ब्रांच से लेकर विदेश में काम कर रही ब्रांचेज भी शामिल होगी। हालांकि सरकार के इस प्रपोजल का बैंक कर्मचारियों ने विरोध करना भी शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि अगर सरकारी बैंक की ब्रांचेज प्रॉफिटेबल हो सकती है, लेकिन उन्हें इसके लिए प्रोफेशनल रुप से बैंकिंग सर्विसेज देनी होगी। सरकार उनके जरिए सभी सोशल स्कीम भी चलाती है और बाद में उनसे कॉरपोरेट के तरह व्यवहार कराना भी चाहती है। देश में इस समय सरकारी बैंकों को की करीब 95 हजार से  ब्रांचेज हैं। जिसमें क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की 20 हजार ब्रांचेज शामिल है।
 
क्या है प्रपोजल
 
फाइनेंस मिनिस्ट्री बदलते टेक्नोलॉजी के दौर में ब्रांच बैंकिंग पर डिपेंडेंसी कम करना चाहती है। जिसके लिए उसने बैंकों से कहा है कि वह अपनी ब्रांचेज की प्रॉफिटिबिलिटी चेक करें। जिसमें देश की ब्रांचेज के साथ-साथ विदेश की ब्रांचेज भी शामिल होंगी। इस मामले पर नेशनल बैंक ऑर्गनाइजेशन बैंक्स वर्क्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी अश्विनी राणा ने moneybhaskar.com को बताया कि सरकार का यह कदम पूरी तरह से गलत है। अगर ऐसा होता है तो सरकारी बैंकों की 50 फीसदी ब्रांच बंद हो जाएंगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि जो बैंकों का स्ट्रक्चर है उसमें अधिकतर ब्रांचेज डिपॉजिट करने और विद्ड्रॉल करने के लिए इस्तेमाल होती है। ब्रांच की जो कमाई होती है वह कर्ज देने से होती है, जो कि अब केवल स्पेशलाइज्ड ब्रांच से होता है। राणा के अनुसार फैसले का सबसे ज्यादा असर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों पर पड़ेगा। इनकी ज्यादातर ब्रांच घाटे में हैं।
 
सरकारी बैंकों को भी प्राइवेट बैंकों के तरह मिले छूट
 
राणा के अनुसार सरकारी बैंक पूरी तरह से प्रोफेशनल तरीके से काम नहीं कर पाते हैं। उसकी वजह यह है कि सरकार की ज्यादातर सोशल स्कीम की जिम्मेदारी सरकारी बैंकों पर ही आती है। चाहे आधार का मामला हो, या फिर जनधन स्कीम या मनरेगा जैसी सोशल वेलफेयर स्कीम हो। ऐसे में जरूरी है बैंक को स्वरूप को न बदला जाय। देश में इस समय करीब 8 लाख सरकारी बैंकों के कर्मचारी है। जो बैंकिंग सर्विसेज के अलावा सोशल वेलफेयर स्कीम को बेहतर रुप से चलाने के लिए भी काम कर रहे हैं।
 
बैंकों को सरकार देगी 2 लाख करोड़
 
सरकार ने हाल ही में बैंकों के लिए 2.11 लाख करोड़ रुपए के रीकैपिटलाइजेशन प्लान को मंजूरी दी थी। बैंकों को यह पैसा 2 साल में दिया जाना है। इसमें 1.35 लाख करोड़ का रीकैपिटलाइजेकशन बॉन्ड लाया जाएगा, वहीं, 76 हजार करोड़ रुपए बजट और बाजार से जुटाए जाएंगे। इसमें से बाजार से 58000 करोड़ जुटाने हैं। 18 हजार करोड़ रुपये इंद्रधनुष योजना के तहत दिए जाएंगे। सी के तहत बैंक सरकारी की हिस्सेदारी कम करने की योजना में हैं। 
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