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जान लीजिए अपने 10 अधिकार, बैंक वाले नहीं कर पाएंगे परेशान

बैंकों के लिए अनिवार्य है RBI के बैंकिंग कोड्स का पालन करना

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नई दिल्ली. शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसे बैंकों से शिकायत न हो। बैंकों की मनमानी बढ़ती जा रही है। ऐसे में, आपके लिए अपने अधिकार जानना जरूरी हैं, जिनका इस्तेमाल कर आप बैंकों की मनमानी को रोक सकते हैं। बैंक में  ज्‍यादा से ज्‍यादा बेहतर सुविधाएं मिलें, इसके लिए आरबीआई की ओर से गठित बैंकिंग कोड्स एंड स्टैन्डर्ड्स बोर्ड ऑफ इंडिया (बीसीएसबीआई) ने ग्राहकों के लिए कुछ अधिकार बनाए हैं। अगर कोई भी बैंक कर्मचारी या मैनेजर आपको बेवजह परेशान करे या सर्विस नहीं दे तो आप इन अधिकारों का इस्‍तेमाल करके उसकी शिकायत तक कर सकते हैं। शिकायतकर्ता अधिकारी को आपकी शिकायत तय समय के भीतर निपटानी होगी। साथ ही आपको शिकायत की एक रिसीविंग कॉपी भी देनी होगी। आइए जानते हैं बैंक में मिलने वाले कुछ ऐसे ही अधिकारों के बारे में...  

 

#अकाउंट खोलने का अधिकार  

बीएसबीडी यानी बेसिक या छोटा खाता हर व्‍यक्ति का अधिकार है। एक फोटो और बैंक के खाता खोलने के फार्म पर हस्ताक्षर करके या अंगूठा लगाकर इसे खोला जा सकता है। इस खाते में लेन-देन की सीमा है। हालांकि कोई भी बैंक केवल पर्मानेंट पते के सबूत के अभाव में देश के किसी भी इलाके में रहने वाले भारतीय नागरिक का खाता खोलने से इनकार नहीं कर सकता।

 

#विशेष शर्तों की जानकारी पाने का हक 

बैंकों के लिए जरूरी है कि वे डिपॉजिट  खातों की विशेष शर्तों की जानकारी ग्राहकों को खाता खोलने के समय दें। यह किसी भी ग्राहक का हक है। अगर बैंक ऐसा नहीं कर रहे हैं तो आप शिकायत कर सकते हैं।  

 

#शून्‍य राशि पर भी बंद नहीं हो सकता खाता 
बीएसबीडी खाते में अगर राशि शून्‍य हो गई है तो भी बैंक आपका खाता बंद नहीं कर सकते हैं। साथ ही मिनिमम अमाउंट के नाम पर किसी तरह का जुर्माना लगाने का अधिकार भी उनके पास नहीं है। 

 

#मुफ्त में दोबारा खाता चालू करना  
बैंक के खाते को दोबारा चालू कराने के लिए बैंक आपसे कोई फीस नहीं ले सकता है। अगर लेता है तो यह गलत है। 

 

#फटे-पुराने नोट बदलवाना 
अगर आपको कहीं से फटा या पुराना नोट मिल गया है तो आप बैंक की किसी भी शाखा में जाकर अपने फटे/पुराने नोट बदल सकते हैं। बैंक नोट बदले से इनकार नहीं कर सकते हैं। 

 

#शिकायत करने का अधिकार   
अगर आप बैंक की किसी सेवा से संतुष्ट नहीं है, तो आप बैंक के शाखा अधिकारी या टॉल फ्री नम्बर पर इसकी शिकायत कर सकते हैं। साथ ही अगर कोई कर्मचारी आपसे अभद्रता करता है तो इसकी शिकायत भी की जा सकती है। हर बैंक ब्रांच में शिकायत सुनने वाले अधिकारी का नाम व पता लिखा होता है। अधिकारी को आपकी शिकायत की रिसीट की कॉपी भी देनी होती है। 

 

#बुजुर्ग/विकलांग की एक ही विंडो पर हर सर्विस 
बुजुर्ग/विकलांग लोगों को एक ही खिड़की (जगह) पर सारी सुविधाएं देना बैंकों के लिए जरूरी है।

 

 

आगे पढ़ें : और अधिकारों के बारे में जानें 

 

फंड ट्रांसफर का अधिकार
कोई भी व्यक्ति किसी भी बैंक से नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (एनईएफटी) के जरिए 50,000 रुपए तक रकम किसी अन्य बैंक खाते में जमा करा सकता है। इसके लिए जरूरी नहीं है कि संबंधित बैंक में उस व्यक्ति का खाता हो।
चेक कलेक्शन में देरी पर मुआवजा
 चेक कलेक्शन में बैंक की तरफ से निर्धारित समय से ज्यादा वक्त लगने पर ग्राहकों को मुआवजा पाने का अधिकार है। मुआवजे की रकम साधारण ब्याज दर के हिसाब से चुकाई जाएगी।

 

 

आगे पढ़ें : कुछ और अधिकारों के बारे में जानें 

सिक्योरिटी वापस लेने का हक
यदि किसी ग्राहक ने बैंक से लोन लिया है, जिसके लिए सिक्योरिटी दी है तो इस मामले में पूरी देनदारी चुकाए जाने के 15 दिन के भीतर सिक्योरिटी वापस मिलनी चाहिए।

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