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70 साल में पहली बार मोदी सरकार ने यूज की खास पावर

आरबीआई और सरकार के बीच टकराव की बनी वजह

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नई दिल्ली. भले ही सरकार की तरफ से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऐसी खबरें हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार ने हाल में ऐसी पावर का यूज किया है जिसका आजादी के 70 साल के इतिहास में कभी इस्तेमाल नहीं किया गया। इस खबर के बाद जहां रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है, वहीं देश में राजनीतिक मोर्चे पर भूचाल आ गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने इस बात की पुष्टि की है कि हाल में मोदी सरकार ने आरबीआई एक्ट के सेक्शन 7 का इस्तेमाल किया है। आइए, जानते हैं कि आरबीआई का सेक्शन 7 क्या है और इस सेक्शन के तहत केंद्र सरकार क्या-क्या कर सकती है ? 

 

RBI को दे सकती है निर्देश 
रिजर्व बैंक के गवर्नर से सलाह-मशविरा करने के बाद केंद्र सरकार जनता के हित में समय-समय पर आरबीआई को निर्देश दे सकती है। 

 

बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को सौंपी जा सकती है पावर 
सेक्शन 7 लागू होने की स्थिति में आरबीआई का सामान्य कामकाज, सुपरविजन सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को सौंप दिया जाता है, जो RBI की सभी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है। यह बोर्ड वह सभी काम कर सकता है, जो आरबीआई दिनों दिन करता है। 

 

कैसे काम करेगा बोर्ड 
इसके अलावा, किसी तरह के टकराव से बचने के लिए सेंट्रल बोर्ड, गवर्नर और उनकी अनुपस्थिति में उनके द्वारा नियुक्त डिप्टी गवर्नर द्वारा बनाए गए नियमों के तहत बोर्ड के पास बैंक का काम करने की पावर होगी, इसमें बैंक का बिजनेस, रुटीन अफेयर्स और सुपरविजन जैसे काम शामिल हैं।  

 

आगे पढ़ें : क्या है मामला 

 

RBI को जारी किए लेटर 
गौरतलब है कि आरबीआई के डिप्टी गर्वनर द्वारा सरकार पर हस्तक्षेप का आरोप लगाने के बाद बवाल बढ़ा है। यही वजह है कि सरकार ने रिजर्व बैंक पर सख्ती करनी शुरू कर दी है। इसके बाद से चर्चा है कि रिजर्व बैंक गर्वनर उर्जित पटेल इस्तीफा दे सकते हैं।

वहीं न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सरकार ने आरबीआई एक्ट के सेक्शन 7 (1) के अंतर्गत विभिन्न मुद्दों पर कम से कम तीन लेटर जारी किए, जिससे सरकार को पब्लिक इंटरेस्ट के मुद्दों पर केंद्रीय बैंक को दिशा-निर्देश देने का अधिकार मिलता है।

 

आगे पढ़ें : क्या कह रही है सरकार 

 

क्या कह रही है सरकार 
बेशक सरकार सेक्शन 7 के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कह रही है, लेकिन वित्त मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस बयान में आरबीआई को कानून की याद दिलाई है। मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि सरकार और केंद्रीय बैंक, दोनों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सार्वजनिक हित एवं भारतीय अर्थव्यवस्था की जरूरतों का ख्याल रखना होता है। इसके लिए कई मुद्दों पर सरकार और आरबीआई के बीच समय-समय पर गहन चर्चा होती है। यही अन्य नियामकीय संस्थाओं (रेग्युलेटर्स) पर भी लागू होता है। 

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