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प्राइवेट जॉब में भी मिलेगी पेंशन, 1000 से करें शुरुआत

सरकारी नौकरी की तहत रिटायरमेंट के बाद प्राइवेट कर्मचारियों को भी मिलेगी पेंशन

How can open NPS Account

नई दिल्ली।

अधिकतर भारतीय सरकारी नौकरी में सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन की वजह से ऐसा मानते हैं कि सरकारी नौकरी उनके भविष्य को सुरक्षित रखने में मदद करेगी। भारतीयों में यह सबसे आम मिथक है। पेंशन या सेवानिवृत्ति योजनाएं वृद्धावस्था के दौरान, जब लोगों के पास आमदनी का नियमित स्रोत नहीं होता, वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करती है । यह बचत के निवेशित और संचित करने का अवसर प्रदान करती है और  इससे व्यक्ति सेवानिवृत्ति पर वार्षिकी योजना के माध्यम से  एकमुश्त राशि और /  या नियमित आय प्राप्त करता है।  यह सुनिश्चित करती हैं कि लोग सम्मान के साथ  और  वृद्धापेवस्था  के  दौरान अपने जीवन स्तर पर किसी भी प्रकार का समझौता किए बिना रहें।  इसके अलावा, सर्वेक्षणों से पता चलता  है कि  अधिकतर  निजी  क्षेत्र  के कर्मचारी   उनके लिए उपलब्ध पेंशन योजनाओं के विषय में अनभिज्ञ हैं।
  
भारत में बढ़ रही है आत्मनिर्भरता 
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, वृद्ध जनसंख्या (60 वर्ष की आयु और उससे अधिक आयु के व्यक्ति) 104 मिलियन पाई गई जो 2011 में कुल जनसंख्या का 8.6 प्रतिशत था I परिणामस्वरुप, वृद्धावस्था निर्भरता अनुपात   जो  भारत में  कामकाजी आबादी  पर वृद्धों की निर्भरता को इंगित करता है 1991 में 12.2 प्रतिशत से बढ़कर 2001 में 13.1 प्रतिशत हो गया और 2011 में यह 14.2 प्रतिशत हो गया।  गिरते जन्म और मृत्यु दर के साथ  प्रति व्यक्ति आय में बेहतर वृद्धि, बेहतर जीवन स्थिति और बेहतर चिकित्सा सेवाओं के कारण जीवन प्रत्याशा धीरे-धीरे बढ़ रही है।  परिणामस्वरुप, वृद्ध आबादी का भाग और आकार दोनों समय के साथ बढ़ रहा है।  वृद्ध आबादी का अनुपात 2011 में आबादी के 8.6% से 2050  तक  20% तक बढ़ने की उम्मीद है।  हालांकि, भारत में निर्भरता अनुपात विकसित देशों जैसे, अमेरिका, यूरोप और जापान की तुलना में बहुत कम है, किन्तु अब यह  तेजी  से  बढ़ रहा है  ।  इस सांख्यिकीय आंकड़े को  देखकर,    पेंशन के लिए बचत के महत्व को समझना महत्वपूर्ण है, जिससे लोग अपनी वृद्धावस्था में आर्थिक रूप से स्वतंत्र रहें ।
  
1000 रुपए से कर सकते हैं शुरू 
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) एक स्वैच्छिक, परिभाषित अंशदान सेवानिवृत्ति बचत योजना है  (जो पीएफआरडीए की  नियामक सीमा के तहत आती है)  जिसे अपने अभिदाताओं को उनके सक्रिय कामकाजी जीवन के दौरान व्यवस्थित बचत के माध्यम से उनके  भविष्य के बारे में इष्टतम निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए परिकल्पित किया गया है।  एनपीएस सभी भारतीय नागरिकों के लिए 18 से 65 की आयु के बीच उपलब्ध है। यह एक परिभाषित अंशदान  (डीसी) पेंशन योजना है जिसमें अभिदाताओं द्वारा किए गए अंशदान  बाज़ार रिटर्न  अर्जित करने के लिए निवेश किए जाते हैं  ।  हालांकि, सरकारी कर्मचारियों के लिए यह अनिवार्य है,  एनपीएस निजी या असंगठित क्षेत्र के व्यक्तियों के लिए  स्वैच्छिक आधार पर उपलब्ध है  ।  ऐसे व्यक्ति जो स्वैच्छिक आधार पर एनपीएस में शामिल होते हैं, प्रत्येक वर्ष रु. 1000  का न्यूनतम  अंशदान  कर सकते  हैं, उनके लिए एक वर्ष में अधिकतम अंशदान पर कोई सीमा नहीं है  ।  संचित राशि को  विविध  प्रतिभूतियों  जैसे- सरकारी प्रतिभूतियों, कॉर्पोरेट डिबेंचर/ बॉन्ड और इक्विटी में निवेश किया जाता है  ।
  
ऑनलाइन चेक कर सकते हैं खाता 
अभिदाता  पंजीकरण के  लिए  निर्धारित प्रपत्र  जमा  करके एक एनपीएस खाता  खोला जा सकता है, जो सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों, डाकघरों और कुछ गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों सहित 74 पंजीकृत उपस्थिति अस्तित्वों(पीओपी) के साथ उपलब्ध है,  जिसके लिए अब तक 78,000 से अधिक कार्यालय पंजीकृत हैं।  एक बार पंजीकृत होने पर अभिदाता को एक अद्वितीय सेवानिवृत्ति खाता   संख्या (PRAN) मिल जाता है  ।  पीएफआरडीए योजनाओं के तहत अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) भी अपना पेंशन खाता खोल सकते हैं।  अभिदाताओं के पंजीकरण में सुगमता को सुनिश्चित करने के लिए पीएफआरडीए ने एक ऑनलाइन मंच-ई-एनपीएस भी शुरू किया  है जिसके तहत एक व्यक्ति   केवाईसी दस्तावेज के रूप में बैंक खाते के साथ  उसके  आधार  कार्ड  या पैन  कार्ड  का उपयोग करके ऑनलाइन अपने एनपीएस खाता खोल सकता है।  कोई भी संभावित अभिदाता एनपीएस न्यास वेबसाइट  (www.npstrust.org.in) पर जा सकता है  और एनपीएस में पंजीकृत होने और अंशदान करने के लिए एनपीएस ऑनलाइन मेन्यू का चयन कर सकता है।  यह एनपीएस के लिए अपने अभिदाताओं को कुछ पीओपी द्वारा अपने इंटरनेट पोर्टल पर प्रदान की जाने वाली विस्तारित ऑनलाइन पंजीकरण सुविधाओं के अतिरिक्त है ।

 

क्या हैं फायदे 
एनपीएस के नीचे उल्लेखित कई लाभों के कारण इसे दीर्घकालिक बचत/सेवानिवृत्ति के लिए एक अच्छे उत्पाद के रूप में माना जा सकता है :
  
- लचीलापन:  एनपीएस आपके निवेश को उचित तरीके से बढ़ाने के लिए पेंशन निधि प्रबंधकों (पीएफएम) के विकल्पों और निवेश विकल्पों की एक श्रृंखला प्रदान करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपके धन में वृद्धि हो रही है।  व्यक्ति एक निवेश विकल्प से दूसरे में या एक निधि प्रबंधक  से दूसरे में जा सकता  है, जो कि कुछ विनियामक शर्तों  के अधीन होगा ।
  
- सरलता: एनपीएस खाता खोलने से अभिदाता को स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या (PRAN) प्राप्त होता है, जो एक अद्वितीय संख्या है और जो जीवनपर्यंत अभिदाता के साथ रहता है।  ईएनपीएस के माध्यम से खाते खोलने की ऑनलाइन शुरुआत ने खाता खोलने की प्रक्रिया को और सरल बना दिया है।
  
- पोर्टेबिलिटी:  एनपीएस सभी अन्य उपलब्ध पेंशन योजनाओं के विपरीत सभी नौकरियों और स्थानों पर निर्बाध सुवाह्यता (पोर्टेबिलिटी) प्रदान करता है, और इस प्रकार  व्यक्तिगत अभिदाताओं के  लिए यह एक कष्टमुक्त व्यवस्था है।
  
-विनियमितता:   पीएफआरडीए, जो एक पेंशन नियंत्रक है द्वारा पारदर्शी निवेश मानदंडों, एनपीएस न्यास अर्थात् ऐसी इकाई जो अभिदाताओं के खातों को प्रबंधित करती है निधि प्रबंधकों की नियमित निगरानी और प्रदर्शन समीक्षा करती है, के माध्यम से एनपीएस को विनियमित किया जाता हैI


टैक्स छूट भी ले सकते हैं आप
इनके अलावा,  एनपीएस अपने अभिदाताओं को अद्वितीय कर लाभ प्रदान करता है।  कर्मचारियों के वेतन (बेसिक + महंगाई भत्ता) का 10% तक अंशदान आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 सीसीसीडी (1) के तहत कर छूट प्राप्त होगा, जो कि धारा 80 सीसीई के तहत रुपये 1,50,000 की सीमा के अधीन होगा ।  इसके अलावा, एनपीएस के लिए विशेष रूप से, धारा 80 सीसीसीडी (1बी) के तहत रुपये 50,000 तक के निवेश पर अतिरिक्त छूट प्रदान की गयी है।    अतः कुल 2 लाख रुपये की छूट का दावा किया जा सकता है।
  
इम्प्लॉयर के शेयर में भी मिलती है टैक्स छूट 
इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों को नियोक्ता के अंशदान पर भी कर छूट मिलती है, जो धारा 80 सीसीसीडी (2) के तहत मूल वेतन और महंगाई भत्ता के 10% तक जा सकती है, जो कि बिना किसी मौद्रिक सीमा के होगी । पीएफआरडीए के प्रशासन के तहत अभिदाताओं की कुल संख्या लगभग है  2.17 करोड़ है जबकि प्रबंधन के अधीन परिसंपत्तियां  2.42 लाख करोड़ रुपए से अधिक है।

 

हेमंत जी कांट्रेक्टर

(लेखक पेंशन निधि विनियामक और विकास  प्राधिकरण (PFRDA) के अध्यक्ष हैं ) 
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