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IL&FS की डूबती नैया को एलआईसी एवं ओरिक्स का सहारा, रिजर्व बैंक सक्रिय

IL&FS अपनी परिसंपत्तियां बेचकर 60,000 करोड़ रुपये तक जुटा सकती है

Matter of IL&FC : LIC and Orix may support IL&FS

 

मनी भास्कर नई दिल्ली।

आईएलएंडएफएस की डूबती नैया को अब एलआईसी व जापान की ओरिक्स कॉरपोरेशन का सहारा दिख रहा है। मौजूदा नकदी संकट से उबरने के लिए आईएलएंडएफएस ने अपने शेयरधारकों से 4500 करोड़ रुपये की मांग की है। कंपनी में एलआईसी की 25.34 फीसदी की हिस्सेदारी है। कंपनी में जापान की ओरिक्स कॉरपोरेशन की 23.54 फीसदी और अबु धाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी की 12.56 फीसदी हिस्सेदारी है। एचडीएफसी की 9.02 फीसदी की हिस्सेदारी है। आईएलएंडएफएस को मौजूदा संकट से उबारने के लिए शनिवार को आरबीआई ने बैठक बुलाई थी। आईएलएंडएफएस के डूबने पर कई गैर बैंकिंग वित्तीय संस्था (एनबीएफसी) के डूबने की आशंका है। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि संकट में फंसी बुनियादी ढांचा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी आईएलऐंडएफएस अपनी परिसंपत्तियां बेचकर 60,000 करोड़ रुपये तक जुटा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि एलआईसी कंपनी के राइट्स इश्यू में भागीदारी के जरिये अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए तैयार है। शनिवार को बुलाई गई बैठक में आईएलऐंडएफएस के अध्यक्ष हेमंत भार्गव और जापान की ओरिक्स कॉर्प के शीर्ष अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।

 

शेयरधारकों से 4500 करोड़ की मांग की

मौजूदा नकदी संकट से उबरने के लिए कंपनी ने शेयरधारकों से 4,500 करोड़ रुपये की मांग की है। कंपनी में एलआईसी की सर्वाधिक 25.34 फीसदी और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (7.67 फीसदी) और भारतीय स्टेट बैंक (6.42 फीसदी) की भी आईएलऐंडएफएस में मामूली हिस्सेदारी है। कंपनी ने इस महीने के मध्य से अपने कर्ज की अदायगी नहीं की है। आईएलएंडएफएस में भारतीय संस्थाओं की संयुक्त रूप करीब 49 फीसदी हिस्सेदारी है। राइट्स इश्यू से कंपनी को सहयोगी कंपनियों की फंड की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक आईएलएंडएफएस की कई सहयोगी कंपनियों ने भी अपने ऋण के पुनर्भुगतान में चूक की है। कंपनी 150 रुपये के भाव पर शेयर बेच सकती है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसे कुछ शेयरधारक प्रीमियम पर कंपनी में निवेश करने को इच्छुक नहीं हैं।

 

 

एलआईसी व एसबीआई ने निवेश पर सहमति जताई

 

जानकारों का कहना है कि कंपनी अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में कामयाब रहेगी क्योंकि एलआईसी और भारतीय स्टेट बैंक ने कंपनी में और निवेश करने पर सहमति जताई है। लेकिन आईएलएंडएफएस के अधिकांश ऋणदाता अपने निवेश में नुकसान झेलने की तैयारी कर रहे हैं।  पनी ने बंबई स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि उसने अपनी योजना पेश करने में कुछ राहत पाने के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि पंचाट (एनसीएलटी) में याचिका दायर की है। यह योजना कानूनों के अनुरूप तैयार की जाएगी और इसके लिए शेयरधारकों, ऋणदाताओं और संबंधित कंपनियों के निदेशक मंडलों से जरूरी सहमति ली जाएगी। एनसीएलटी को अभी इस याचिका पर सुनवाई करनी है। कंपनी कानून, 2013 की धारा 230 से 240 तक में समझौते, व्यवस्था, एकीकरण, विलय और कंपनी कर्ज पुनर्गठन से संबंधित प्रावधान हैं। एनसीएलटी में अर्जी दाखिल होने के बाद पंचाट कंपनी के शेयरधारकों और ऋणदाताओं की एक बैठक बुलाता है और फिर कंपनी के कर्ज पुनर्गठन की योजना को वोटिंग के लिए रखा जाता है।

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