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नीरव मोदी जैसे देश में हैं 5580 डिफॉल्टर, लगा चुके हैं 49 हजार करोड़ का चूना

बैंकों से करोड़ों रुपए के लोन लेकर उन्हें डकारने वाले देश में हजारों नीरव मोदी हैं।

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नई दिल्ली. देश में बैंकों से करोड़ों रुपए के लोन लेकर उन्हें डकारने वाले नीरव मोदी अकेले नहीं हैं। मंगलवार को सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के दर्जनों बैंकों के हजारों विलफुल डिफॉल्टर्स की लिस्ट सामने आई। ये लोग बैंकों को लगभग 49 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का चूना लगा चुके हैं। बैंकिंग इंडस्ट्री की डिटेल के मुताबिक फिलहाल अनुमानित तौर पर देश में विलफुल डिफॉल्टर की संख्या लगभग 5580 है। हालांकि इसमें कुछ बदलाव हो सकता है।

 

 

SBI के टॉप 5 विलफुल डिफॉल्टर


-किंगफिशर एयरलाइंस पर 1201.39 करोड़ रुपए
-एक्‍सएल एनर्जी लिमिटेड पर 413.14  करोड़ रुपए
-इग्‍नाइट एजुकेशन लिमिटेड पर 316.13 करोड़ रुपए 
-श्रीम कार्पोरेशन पर 283.08 करोड़ रुपए 
-टेलीडाटा मरीन सॉल्‍यूशन लिमिटेड पर 167.28 करोड़ रुपए
 
 
पीएनबी के टॉप 5 विलफुल डिफॉल्टर
-विनसम डायमंड पर 900.37 करोड़ रुपए
 -फॉरएवर प्रीसियस ज्‍वैलरी पर 747.98 करोड़ रुपए 
 -जूम डेवलपर्स पर 410.18 करोड़ रुपए 
 -वीएमसी सिस्‍टम्‍स लिमिटेड पर 296.08 करोड़ रुपए 
 -एमबीएस ज्‍वैलर्स प्राइवेट लिमिटेड पर 266.17 करोड़ रुपए 
 
 
बैंक ऑफ बड़ौदा के टॉप 5 विलफुल डिफॉल्टर
-पर्ल विजन प्राइवेट लिमिटेड पर 103.95 करोड़ रुपए 
-सेंचुरी कम्‍युनिकेशंस पर 87.86 करोड़ रुपए 
-पिक्‍सन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड पर 83.63 करोड़ रुपए 
 -विक्‍ट्री इलेट्रिकल पर 82.43 करोड़ रुपए 
 -मालडार बारेल्‍स प्राइवेट लिमिटेड पर 80.41 करोड़ रुपए 
 
  
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के टॉप 5 विलफुल डिफॉल्टर
-विनसम डायमंड ज्‍वैलर्स पर 549.26 करोड़ रुपए 
-इलेक्‍ट्रोथर्मल (इंडिया) लिमिटेड पर 385.26 करोड़ रुपए 
-एस कुमार नेशनवाइड पर 283.90 करोड़ रुपए 
-फॉरऐवर प्रीसियस ज्‍वैलर्स पर 254.07 करोड़ रुपए 
-सूर्या विनायक पर 154.99 करोड़ रुपए 
 
 
ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स के टॉप 5 विलफुल डिफॉल्टर
-द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल पर 257.70 करोड़ रुपए 
 -डीएसी लिमिटेड पर 230.10 करोड़ रुपए 
 -लिलिपुट किडवेयर 220.91 करोड़ रुपए 
 -विनसम डायमंड ज्‍वैलर्स पर 145.81 करोड़ रुपए 
-जूम डेवलपर्स 127.78 करोड़ रुपए
 
 

 

 

किसे घोषित किया जाता है विलफुल डिफॉल्टर

रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों के मुताबिक कोई भी बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन अपने कस्टमर्स को चार परिस्थितियों में विलफुल डिफॉल्टर यानी जानबूझ कर कर्ज नहीं लौटाने वाला ग्राहक घोषित कर सकते हैं।

पहलाः जब कस्टमर वित्तीय तौर पर सक्षम होने के बावजूद देय तिथि को कर्ज की किस्त नहीं लौटाए।

दूसराः कर्ज की राशि का इस्तेमाल उस कार्य के लिए नहीं किया जाए, जिसके वास्ते उसे लिया गया है।

तीसराः कर्ज की राशि का इस्तेमाल एसेट निर्माण के लिए नहीं किया गया हो। कंपनी या ग्राहक कर्ज की राशि के उपयोग का कोई औचित्य नहीं बता सके।

चौथाः कर्ज की राशि से खरीदी गई संपत्ति को किसी दूसरे पक्ष के बगैर बैंक या वित्तीय संस्थान को जानकारी दिए बेच दिया जाए।

 

 

विलफुल डिफॉल्टर पर एक्शन ले सकते हैं बैंक

ऐसे ग्राहकों को विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकते हैं।

इसके तहत कस्टमर्स की एसेट्स की कुर्की, जब्ती, कंपनी में उनके अधिकारों को खत्म करने, ग्राहकों की तरफ से संचालित कंपनी के प्रबंधन को अपने हाथ में लेने जैसे कठोर कदम उठाए जाते हैं।

 

 

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