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PNB फ्रॉड इम्प्लॉइज की लापरवाही का नतीजा, सही वक्त पर होगा एक्शनः RBI

पीएनबी में 11,400 करोड़ रुपए के स्कैम पर आरबीआई ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है।

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मुंबई. पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 11,400 करोड़ रुपए के स्कैम पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी। आरबीआई ने शुक्रवार को कहा कि वह स्कैम से प्रभावित पीएनबी के कंट्रोल सिस्टम का पहले ही एसेसमेंट कर चुका है और वक्त आने पर 'उचित सुपरवाइजरी एक्शन' लिया जाएगा।

 

पीएनबी के कंट्रोल सिस्टम का हुआ एसेसमेंटः आरबीआई

देश का दूसरा बड़ा सरकारी बैंक फिलहाल 11,400 करोड़ रुपए के फ्रॉड से जूझ रहा है, जिसमें कथित तौर पर नीरव मोदी का नाम सामने आया है। सेंट्रल बैंक ने एक बयान जारी कर कहा कि उसके द्वारा पीएनबी में कंट्रोल सिस्टम का सुपरवाइजरी एसेसमेंट कर लिया गया है। आरबीआई ने कहा, 'पीएनबी में हुआ फ्रॉड बैंक के एक या ज्यादा कर्मचारियों की लापरवाही और इंटरनल कंट्रोल सिस्टम की नाकामी के चलते पैदा हुए ऑपरेशनल रिस्क का मामला है।'

 

उचित समय पर होगा एक्शन

सेंट्रल बैंक ने कहा, 'इस मामले में उचित समय पर एक्शन लिया जाएगा।' हालांकि आरबीआई ने मीडिया में फैली उन रिपोर्ट्स को खारिज किया, जिनमें लिखा गया था कि सेंट्रल बैंक ने पीएनबी को अन्य बैंकों को जारी किए लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) की कमिटमेंट्स को पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

 

ये मामला सामने कैसे आया?

- पंजाब नेशनल बैंक ने बुधवार को स्‍टॉक एक्‍सचेंज बीएसई को बताया कि उसने 1.8 अरब डॉलर (करीब 11,356 करोड़ रुपए) का संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन पकड़ा है।
- यह फ्रॉड कुछ चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को फायदा पहुंचाने के लिए किए गए थे। 
- बैंक के अनुसार, ऐसा लगता है कि इन ट्रांजैक्‍शन के आधार पर विदेश में कुछ बैंकों ने उन्हें (चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को) कर्ज दिया है। ये अकाउंट्स कितने थे, कितने लोगों को फायदा हुआ? इस बारे में अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। यह मामला 2011 से जुड़ा है।

 

कैसे हुआ फ्रॉड?
- इस पूरे फ्रॉड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे।
- पीएनबी के कुछ अफसरों ने नीरव मोदी को गलत तरीके से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) दी। इसी एलओयू के आधार पर मोदी और उनके सहयोगियों ने दूसरे बैंकों से विदेश में कर्ज ले लिया। पीएनबी ने भले ही दूसरे लेंडर्स के नाम का उल्लेख नहीं किया, लेकिन समझा जाता है कि पीएनबी द्वारा जारी एलओयू के आधार पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और एक्सिस बैंक ने भी क्रेडिट ऑफर कर दिया था। 

 

 

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