Home » Economy » BankingRBI releases ombudsman scheme for NBFC customers

NBFC कस्टमर्स की शिकायतों का जल्द होगा समाधान, RBI ने जारी की ओम्बुड्समैन स्कीम

आरबीआई ने एनबीएफसी के कस्टमर्स के लिए एक ओम्बुड्समैन स्कीम बनाने का ऐलान किया है।

1 of

 

नई दिल्ली. रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनीज (एनबीएफसी) के कस्टमर्स के लिए एक ओम्बुड्समैन स्कीम बनाने का ऐलान किया। इसके माध्यम से कस्टमर्स के लिए एक ग्रीवांस रिड्रेसल मेकैनिज्म यानी शिकायत निवारण तंत्र की पेशकश की जाएगी।

बैंकिंग रेग्युलेटर एक प्रेस रिलीज के माध्यम से कहा कि यह स्कीम तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

 

 

क्रेडिट सिस्टम में होगा सुधार

नोटिफिकेशन के मुताबिक, 'रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के सेक्शन 45एल के अधिकारों के तहत यह फैसला लिया गया है। आरबीआई ने एनबीएफसी के बीच कर्ज देने के लिए एक अनुकूल माहौल को प्रोत्साहन देने और देश की कर्ज व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से इस दिशा में कदम बढ़ाया है। इसलिए डिपॉजिट, लोन और एडवांसेस व अन्य मामलों से संबंधित सेवाओं में कमियों को लेकर आने वाली शिकायतों के समाधान के वास्ते ओम्बुड्समैन सिस्टम उपलब्ध कराना जरूरी हो गया है। इसलिए एनबीएफसी को निर्देश दिया जाता है कि ओम्बुड्समैन स्कीम फॉर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज, 2018 के प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए।'

 

 

आरबीआई का जीएम से ऊपर रैंक का अधिकारी बनेगा ओम्बुड्समैन

इसके तहत रेग्युलेटर द्वारा आरबीआई के महाप्रबंधक या उससे ऊपर की रैंक के अधिकारी को क्षेत्रीय अधिकार के साथ ओम्बुड्समैन के तौर पर नियुक्त किया जाएगा। हर ओम्बुड्समैन का कार्यकाल अधिकतम 3 साल होगा और जरूरत पड़ने पर रेग्युलेटर द्वारा कार्यकाल को घटाया भी जा सकता है।

 

 

ऐसी शिकायतें कर सकेंगे कस्टमर्स

कोई भी कस्टमर या व्यक्ति ओम्बुड्समैन से इंटरेस्ट का भुगतान नहीं करने या भुगतान में देरी, डिपॉजिट का भुगतान नहीं करने, लोन एग्रीमेंट में ट्रांसपरेंसी में कमी, आरबीआई द्वारा एनबीएफसी के लिए निष्पक्ष व्यवहार से संबंधित जारी दिशानिर्देशों का अनुपालन नहीं करने, कस्टमर्स को नोटिस दिए बिना चार्ज वसूलने और बकायों आदि के भुगतान के बावजूद सिक्युरिटीज डॉक्यूमेंट लौटाने में नाकाम रहने या देरी जैसी शिकायतें कर सकता है।

यदि निश्चित समय पर शिकायत का समाधान नहीं होता है तो ओम्बुड्समैन विभिन्न पार्टीज को अपना केस रखने का पर्याप्त मौका दे सकता है। ऐसा लिखित में या मीटिंग के माध्यम से हो सकता है। सुनवाई के बाद ओम्बुड्समैन अपना आदेश दे सकता है या मामला खारिज कर सकता है।

 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट