Utility

24,712 Views
X
Trending News Alerts

ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट

फेसबुक को अब तक का सबसे ज्यादा प्रॉफिट, 63% बढ़कर हुआ 32500 करोड़ रु फोर्ड ने भारत में लॉन्‍च की 'Freestyle', शुरुआती कीमत 5.09 लाख Samsung S9 को अलग लेवल का स्मार्टफोन बनाता है उसका कैमरा मजबूत ग्लोबल संकेतों से मार्केट में तेजी, सेंसेक्स 82 अंक मजबूत HDFC बैंक ने FD पर 1% तक बढ़ाई ब्‍याज दर 13 पैसे मजबूत हुआ रुपया, प्रति डॉलर 66.77 पर पहुंचे भाव कमजोर नतीजों से 5% तक टूटा विप्रो का स्टॉक्स, 6 हजार करोड़ रु घटी मार्केट कैप डूबे कर्ज वसूलने के लिए जासूसों की मदद लेगा PNB, 5 मई तक मांगे आवेदन गेहूं खरीद का 64 फीसदी लक्ष्‍य पूरा, अब तक खरीदा 205 लाख टन ग्राहकों के लि‍ए भि‍ड़ीं कंपनि‍यां, हर प्रोडक्‍ट मि‍ल रहा है 40% सस्‍‍‍‍ता फ्लि‍पकार्ट को मि‍ली बड़ी राहत, डि‍स्‍काउंट पर नहीं देना होगा कोई टैक्‍स डीजल-पेट्रोल की कीमतों में हो सकता है 20% का इजाफा : वर्ल्‍ड बैंक गुरुवार के लिए टॉप इंट्राडे टिप्स, इन स्टॉक्स में मिल सकता है अच्छा रिटर्न रेरा के 2 साल: होम बायर्स के काम नहीं आ रहा कानून, रिपोर्ट में खुलासा इन 4 स्टॉक्स पर 1 से ज्यादा ब्रोकरेज ने लगाया दांव, मिल सकता है 30% तक रिटर्न
बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Bankingसरकारी बैंकों के बट्टे खाते पर राहत, FY17 में घटकर रह गया 13 फीसदी

सरकारी बैंकों के बट्टे खाते पर राहत, FY17 में घटकर रह गया 13 फीसदी

 

 

नई दिल्‍ली. बैंकों के कर्ज को राइट ऑफ (बट्टा खाता) करने में मार्च 2018 में कमी दर्ज की गई है। इस साल मार्च में बैंकों ने अपने कुल ग्रॉस नॉन परफार्मिंग आसेट (NPAs) का केवल 13 फीसदी ही लोन राइट ऑफ किया है, जबकि 2011 में यह 25 फीसदी था। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक ने दी है। बैंकों के सामने NPA का बढ़ता पहाड़ काफी बड़ी समस्‍या है। जब यह कर्ज नहीं वसूल हो पाता है तो बैंक पहले इसे NPA घोषित करते हैं और इसके बाद भी अगर नहीं वसूला जा सके तो इसे राइट आफ करना पड़ता है। ऐसा करने के पहले बैंकों को इस राइट ऑफ के लिए 100 फीसदी प्रोविजनिंग करनी पड़ती है।

 

 

कम हो रहा राइट ऑफ

बैंकों ने मार्च 2006 में अपने कुल ग्रॉस एनपीए का करीब 21 फीसदी राइट ऑफ किया था, जो मार्च 2011 में बढ़कर सबसे ज्‍यादा 25 फीसदी हो गया था। वहीं मार्च 2015 में बैंकों ने 18 फीसदी ग्रास एनपीए का राइट ऑफ किया था। 2011 के बाद से इसमें गिरावट के ट्रेंड लगातार कायम है और मार्च 2017 में 13 फीसदी हिस्‍सा ही राइट ऑफ किया गया है।

 

 

राइट ऑफ बैंकों का रेग्‍युलर काम

बैंक अपने न वसूले जा सके लोन को समय समय पर राइट ऑफ करते रहते हैं। यह बैंकों की एक रुटीन कार्रवाई है। बैंक अपनी बैलेंसशीट को क्‍लीन करने के लिए यह कदम उठाते हैं। बैंक यह कार्रवाई RBI के नियमों के तहत करते हैं।

 

 

कर्ज माफी नहीं है राइट ऑफ

बैंकों का अपनी बैलेंसशीट पर डूबे हुए कर्ज को राइट ऑफ करने का मतलब यह नहीं है कर्ज माफ हो गया है। यह लोन बैंक बाद में कर्जदार से वसूलने का प्रयास करते रहते हैं। इन राइट ऑफ लोन को वसूलने के लिए कई नियम हैं, जिनके तहत यह प्रक्रिया चलाई जाती है। आरबीआई के डाटा के अनुसार सरकारी बैंकों ने 2014-15 से लेकर सितबंर 2017 तक करीब 2,41,911 करोड़ रुपए का एनपीए राइट ऑफ किया है।


 

और देखने के लिए नीचे की स्लाइड क्लिक करें

Trending

NEXT STORY

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.