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RBI लाएगा बिटकॉइन जैसी अपनी करंसी, स्टडी के लिए बनाई कमेटी

अब भारत में बिटकॉइन जैसी वर्चुअल करंसीज की ट्रेडिंग नहीं हो पाएगी।

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नई दिल्ली. अब भारत में बिटकॉइन जैसी वर्चुअल करंसीज की ट्रेडिंग नहीं हो पाएगी। रिजर्व बैंक (आरबीआई) के तहत आने वाले बैंक सहित किसी भी तरह के वित्तीय संस्थान वर्चुअल करंसीज के लिए ट्रेडिंग का माध्यम नहीं बन सकेंगे। आरबीआई का यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसके साथ ही आरबीआई ने अपनी डिजिटल करंसी ‘फिएट’ की पेशकश के लिए स्टडी करने की घोषणा की।

 

 

इंटर डिपार्टमेंट ग्रुप का गठन
सेंट्रल बैंक ने कहा कि ‘सेंट्रल बैंक डिजिटल करंसी’ की पेशकश के लिए ‘इच्छा और व्यवहारिकता’ के अध्ययन और गाइडैंस उपलब्ध कराने के लिए एक इंटर डिपार्टमेंटल ग्रुप का गठन किया गया है, जो जून तक अपनी रिपोर्ट सबमिट करेगा।

 

 

कई सेंट्रल बैंक कर रहे हैं चर्चा
पॉलिसी रिव्यू के बाद आरबीआई के डिप्टी गवर्नर बी पी कानूनगो ने रिपोर्टर्स से बातचीत में कहा, ‘कई सेंट्रल बैंक फिएट डिजिटल करंसी की पेशकश की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं। प्राइवेट डिजिटल टोकन की तुलना में इन्हें सेंट्रल बैंक द्वारा जारी किया जाता है। इनकी पूरी जवाबदेही सेंट्रल बैंक की होतीहै और उन्हें पेपर करंसी के अतिरिक्त सर्कुलेट किया जाएगा।’

 

 

ऐसे ट्रांजैक्शन का माध्यम नहीं बनेंगे बैंक-ई वालेट
आरबीआई ने गुरुवार को हुई वित्त वर्ष 2018-19 की पहली  मॉनिटरी पॉलिसी में कहा कि बैंक, वालेट आदि उसके द्वारा रेग्युलेटेड कोई भी एंटिटी बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी खरीदने या बेचने के लिए किसी व्यक्ति या बिजनेस एंटिटी के साथ डील नहीं कर सकेगी। साथ ही ऐसी सर्विस भी उपलब्ध नहीं करा सकेगी।
इस आदेश के साथ आरबीआई द्वारा रेग्युलेट ई-वालेट और अन्य एंटिटीज पर क्रिप्टोकरंसीज की बिक्री या खरीद पर रोक लग गई है, वहीं कोई व्यक्ति अपने अकाउंट से क्रिप्टो ट्रेडिंग वालेट्स में पैसा भी ट्रांसफर नहीं कर सकेगा।
आरबीआई ने पॉलिसी के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वर्चुअल करेंसी में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में निवेशकों को नुकसान हो सकता है, इसीलिए आरबीआई के अंतर्गत आने वाली सभी संस्थाओं पर वर्चुअल करेंसी के किसी भी लेन-देन, बिजनेस पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है।

 

क्या है क्रिप्टोकरंसी
क्रिप्टोकरंसी इंटरनेट पर चलने वाली एक वर्चुअल करंसी है। इंटरनेट पर इस वर्चुअल करंसी की शुरुआत जनवरी 2009 में बिटकॉइन के नाम से हुई थी। इस वर्चुअल करंसी का इस्तेमाल कर दुनिया के किसी कोने में किसी व्यक्ति को पेमेंट किया जा सकता है और सबसे खास बात यह है कि इस भुगतान के लिए किसी बैंक को माध्यम बनाने की भी जरूरत नहीं पड़ती।

 

इस टेक्नोलॉजी पर आधारित है बिटकॉइन
बिटकॉइन का इस्तेमाल पीयर टू पीयर टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इसका मतलब कि बिटकॉइन की मदद से ट्रांजैक्शन दो कंप्यूटर के बीच किया जा सकता है। इस ट्रांजैक्शन के लिए किसी गार्जियन अथवा सेंट्रल बैंक की जरूरत नहीं पड़ती। बिटकॉइन ओपन सोर्स करंसी है जहां कोई भी इसकी डिजाइन से लेकर कंट्रोल को अपने हाथ में रख सकता है।

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