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FIU को जुटाईं रिकॉर्ड 886 सूचनाएं, तैयार की 30 रिपोर्ट्स

FIU ने नकली करेंसी और धोखाधड़ी की के बारे में सबसे ज्‍यादा जानकारियां एकत्र कीं।

FIU mandated to analyse suspicious financial transactions to money laundering

 

नई दिल्‍ली. नोटबंदी के बाद से फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट (FIU) ने नकली करेंसी और धोखाधड़ी की के बारे में सबसे ज्‍यादा जानकारियां एकत्र कीं। यह जानकारियां बैंकों और अन्‍य वित्‍तीय संस्‍थानों से मिलीं। एक रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी वाले साल (2016-17) में FIU को 886 सूचनाएं मिली हैं। 2015-16 में इन शिकायतों की संख्‍या 850 थीं। इनके आधार पर एजेंसी ने 30 अलग अलग रिपोर्ट तैयार कीं, जिन के आधार पर अन्‍य जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की।

 

2016-17 में आईं सर्वाधिक शिकायतें

वर्ष 2016-17 के दौरान जांच एजेंसियों की तरफ से FIU के पास सबसे ज्‍यादा शिकायतें आई हैं। इनमें से इंटेलीजेंस एजेंसीज की तरफ से 754 और इंफोर्समेंट एजेंसीज की तरफ 132 शिकायतें मिलीं। वर्ष 2014-15 में 450, 2013-14 में 594, 2012-13 में 549 और 2011-12 में इन शिकायतों की संख्‍या 590 थी।

 

 

FIU को देनी होती हैं संदिग्‍ध जानकारी

FIU को नकली करेंसी और वित्‍तीय धोखाधड़ी की जानकारी देना जरूरी है। यह मिनिस्‍ट्री ऑफ फाइनेंस के तहत काम करने वाली एजेंसी है। यहां पर दो तरह की जानकारी संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन रिपोर्ट (STRs) और काउंटरफिट करेंसी रिपोर्ट (CCRs) बैंक और वित्‍तीय संस्‍थान देते हैं। इन सूचनाओं का FIU विश्‍लेषण करती है और बाद में रिपोर्ट बना कर इंटेलीजेंस ब्‍याेरो (IB), रिसर्च एंड एनालेसिस विंग (RAW) सहित डिफेंस इंटेलीजेंस सहित अन्‍य एजेंसियों से इसे शेयर किया जाता है। इनमें इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट सहित सीबीआई भी शामिल है।

 

कई तरह की जानकारियां दीं

वर्ष 2016-17 के दौरान FIU ने मनी लाउंडरिंग, टेरोरिस्‍ट फाइनेंसिंग, कार्पोरेट फ्रॉड, आर्गनाइज्‍ड क्राइम, फेक कंरसी सहित टैैक्‍स चोरी सहित अन्‍य जरूरी जानकारियां अन्‍य एजेंसियों की शेयर कीं। FIU ने इस तरह की 30 अलग अलग रिपोर्ट तैयार की थीं। इन रिपोर्ट के आधार पर जांच एजेंसियों ने कई जगह छापेमारी की और अन्‍य एक्‍शन लिए।

 

नोटबंदी के दौरान रेड फ्लैग इंडीकेटर विकसित किया

FIU के निदेशक पंकज कुमार मिश्र ने इस रिपोर्ट में अपने नोट में लिखा है कि एजेंसी ने रेड फ्लैग इंडीकेटर विकसित किया है। ऐसी जानकारियों पर बैंकों के माध्‍यम से संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन पर नोटबंदी के दौरान नजर रखी गई।


 

 

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