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बैंकों से ज्‍यादा हुआ रियल्‍टी सेक्‍टर में NBFC का लोन, NPA बढ़ने की भी आशंका

नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) का लोन रियल स्‍टेट सेक्‍टर में बैंकों से आगे निकल चुका है।

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मुम्‍बई. नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) का लोन रियल स्‍टेट सेक्‍टर में बैंकों से आगे निकल चुका है। 4 लाख करोड़ रुपए के रियल स्‍टेट लोन मार्केट में अब NBFC का लोन बढ़कर 2.2 करोड़ रुपए का हो गया है, जबकि बैंक का शेयर 1.8 लाख का ही है। यह सेक्‍टर पहले नोटबंदी फिर रेरा और इसके बाद GST के चलते दबाव में है। इसके चलते बिल्‍डरों तैयार फ्लैट की संख्‍या तेजी से बढ़ी है और यह 5 लाख तक पहुंच गई है।  
 

 

 

रियल्‍टी सेक्‍टर में हुए तेजी से रिफॉर्म्‍स

हाल ही में रियल्‍टी सेक्‍टर में तेजी से रिफॉर्म्‍स हुए हैं। इनकी शुरुआत नवंबर 2016 में नोटबंदी से हुई। इसके बाद मोदी सरकार ने रियल स्‍टेट रेग्‍युलेटरी एक्‍ट (रेरा) लागू किया। अंत में जुलाई 2017 से GST लागू हो गया। इन सबका रियल स्‍टेट सेक्‍टर पर बुरा असर पड़ा।

 

 

NBFC अब रिकवरी के मोड में

रियल्‍टी सलाहकार कंपनी SILA के प्रबंध निदेशक शाहिल वोरा के अनुसार NBFC जाे आमतौर पर स्‍मॉल और मिड साइज डेवरलर्स को लोन देती हैं, अब रिकवरी के मोड में हैं। उनके अनुसार 2018 में इन NBFC का एनपीए बढ़ सकता है। ऐसे में संभव है कि ये NBFC बड़े डेवलपर्स के साथ मिलकर इनका संचालन का प्रयास करें।

 

 

5 लाख फ्लैट बिना बिके

एक रिपोर्ट के अनुसार देशभर में 2017 के अंत तक 440000 रेजीडेंशियल यूनिट बिना बिकी हुईं थीं। एंबिट कैपिटल की इस रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ सात बड़े शहरों मुम्‍बई, दिल्‍ली एनसीआर, चेन्‍नई, हैदराबाद, पुणे, बेंगलूरू और कोलकाता में ही 34700 यूनिट बिना बिके हुए हैं।

 

 

बैंकों से ज्‍यादा रिस्‍क में

एंबिट कैपिटल के पंकज अग्रवाल के अनुसार जहां बैंकों ने रियल स्‍टेट सेक्‍टर में लोन घटाया है वहीं NBFC का तेजी से बढ़ा है। उनके अनुसार लोन बुक के अनुसार NBFC बैंकों की तुलना में ज्‍यादा रिस्‍क में हैं। पिरामल कैपिटल और जेएम फाइनेंशियल जैसी कंपनियों का पिछले दो साल से आसेट लायबिल्‍टी का मिसमैच बढ़ा है। दूसरी तरफ बॉन्‍ड यील्‍ड में तेजी से बढ़त दर्ज हुई है इससे इन कंपनियों को मार्जिन और आसेट क्‍वालिटी पर दबाव रहेगा।

 

 

बिक्री बढ़ाने में मदद कर रही कंपनियां

वोरा के अनुसार इन NBFC की कई टीम प्रोजेक्‍ट मैनजमेंट में भी मदद कर रही हैं, जिससे बिक्री के टार्गेट पाए जा सकें। इसके लिए खरीदारों काे लोन भी दिया जा रहा है जिससे सेल्‍स के टार्गेट आसानी से पूरे हो जाएं।

 

 
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