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ICICI-वीडियोकॉन लोन मामले में नहीं मिले थे लेन-देन के सबूत: RBI डॉक्यूमेंट

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को 2 साल पहले वीडियोकान ग्रुप को ICICI बैंक से लोन मामले में किसी तरह के लेन-देन का सबूत नहीं मिले थे। 2 साल पहले आरबीआई ने वीडियोकॉन ग्रुप को मिले लोन पर उठे सवाल के बाद विस्तार से जांच की थी। RBI डॉक्यूमेंट्स के अनुसार उसने यह जांच 2016 के मिड में की थी। 

 

 

PM ऑफिस ने रेफर की थी शिकायतें 
आरबीआई ने यह जांच तब की थी, जब प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने पास आई कुछ शिकायतें आरबीआई को रेफर्ड की थीं। इन शिकायतों में आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर पर सवाल डइाया गया था। इसमें कहा गया था कि वीडियोकान ग्रुप ने आईसीआईसीआई बैंक को बड़ा कर्ज दे रखा है। इसमें बैंक की सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर वीडियोकान ग्रुप के साथ साथ मिल कर बड़ा फायदा ले रहे हैं। 

 

जुलाई 2016 में आया था पहला कमेंट 
डॉक्यूमेंट्स और मामले को सीधे जानने वाले सूत्रों के अनुसार आरबीआई ने इस मामले में जुलाई 2016 के मिड में अपना पहला कमेंट करते हुए कहा था कि आईसीआईसीआई बैंक ने कुछ बैंकों के कंसोर्टियम के साथ मिलकर एक डेट कंसोलिडेशन प्रोग्राम के तहत वीडियोकान ग्रुप को 1730 करोड़ रुपए का कर्ज दिया था। बैंक कंसोर्टियम को एसबीआई ने लीड किया था। 

आरबीआई ने कहा कि उसे इस मामले में हितों के टकाराव का कोई मामला नहीं दिखा। हालांकि रिजर्व बैंक ने यह भी कहा था कि दीपक कोचर की कंपनी नूपावर को मिले धन के कुछ सोर्सेज को लेकर वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाया है।

 

RBI ने आरोपों पर भी कमेंट किया था 
उसी साल दिसंबर में आरबीआई ने वीडियोकान को आईसीआईसीआई बैंक से 2007-12 के दौरान मिले कर्ज के बदले लेन-देन के आरोपों पर विस्तार से कमेंट में कहा कि यह बैंक वीडियोकान ग्रुप के नाम 20195 करोड़ रुपए के डेट कंसोलिडेशन प्रोग्राम में शामिल था और उसमें इस बैंक का हिस्सा 1730 करोड़ रुपए का था। कंसोर्टियम में कई बैंक शामिल थे और बैंकों के इस ग्रुप का नेतृत्व एसबीआई कर रहा था। रिजर्व बैंक ने कहा था कि चूंकि इस डेट कंसोलिउेशन प्रोग्राम में अन्य बैंकों की तरह ही आईसीआईसीआई बैंक भी हिस्सा ले रहा था, इसलिए लेन-देन के आरोप की पुष्टि नहीं की जा सकती ।

 

नूपावर के ओनरशिप ट्रांसफर पर ये कहा
रिजर्व बैंक ने कहा था कि नूपावर रीन्यूएबल्स लि. के ओनरशिप के ट्रांसफर का विषय इस बैंक के अधिकार क्षेत्र से बाहर का था। यह कंपनी दीपक कोचर ने धूत फैमिली के साथ मिल कर दिसंबर 2008 में बनी थी। ट्रांसफर मामले की जांच सेबी और कॉर्पोरेट अफेयर मिनिस्ट्री कर सकते हैं। नूपावर को मारीशस के रास्ते मिले निवेश के मामले में रिजर्व बैंक ने कहा कि यह फंड ऑटोमैटिक रूट के तहत आया था, इसमें किसी वॉयलेशन की रिपोर्ट नहीं है। 

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