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बैंक 50 करोड़ से ज्यादा के एनपीए की जांच करें, 15 दिन में सीबीआई को बताएं: वित्त मंत्रालय

पीएनबी में 12,672 करोड़ का फ्रॉड सामने आने के बाद फाइनेंस मिनिस्ट्री ने बैंकों के पर सख्‍ती दिखाई है।

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नई दिल्ली.  पीएनबी फ्रॉड के खुलासे के बाद अब फाइनेंस मिनिस्ट्री ने बैंकों पर सख्‍ती दिखाई है। मिनिस्ट्री ने सभी सरकारी बैंकों से कहा है कि संभावित धोखाधड़ी से बचने के लिए 50 करोड़ रुपए से ऊपर के सभी एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट) की जांच 15 दिन में कर ली जाए। साथ ही इसकी जानकारी भी सीबीआई को समय पर दी जाए। बता दें कि 12,672 करोड़ के पीएनबी घोटाले में हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी मुख्य आरोपी हैं। दोनों देश छोड़कर भाग चुके हैं।

 

फाइनेंस सेक्रेटरी ने दी जानकारी

- फाइनेंस सेक्रेटरी राजीव कुमार ने ट्वीट कर बताया कि पब्लिक सेक्टर बैंकों के मैनेजिंग डायरेक्टर को बैंक फ्रॉड का वक्त रहते पता लगाने और ऐसे मामलों को सीबीआई को देने का निर्देश दिया है। साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून/फेमा/आयात-निर्यात नियमों के वॉयलेशन से जुड़े मामलों की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) को शामिल किया जाए।

 

बैंकों के लिए 15 दिन की डेडलाइन तय 

- देश में सबसे बड़े बैंकिंग फ्रॉड के बाद अब सरकार ने बैंकों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। फाइनेंस मिनिस्‍ट्री ने सभी बैंकों के लिए 15 दिन की डेडलाइन तय की है, जिस दौरान उनको सभी तरह के अपने ऑपरेशनल और टेक्निकल सिस्टम की सफाई करनी होगी।

- इसके साथ ही बैंकों को पहले से चल रहे सभी प्राइवेट कंपनियों के लोन और नॉन प्रॉफिट एसेट्स यानी एनपीए के बारे में जानकारी देनी होगी। बता दें कि पीएसयू बैंकों का कुल एनपीए 8.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।

 

सीनियर अफसरों पर होगी कार्रवाई 

- फाइनेंस सेक्रेटरी ने कहा कि 15 दिन की डेडलाइन के बाद भी अगर बैंकों ने सिस्टम को अपग्रेड और पुराने रिस्क को सही करने में किसी तरह की लापरवाही बरती तो उनके सीनियर अधिकारियों पर सारी जवाबदेही तय की करेंगे। इसके लिए बैंकों के एग्‍जीक्‍यूटिव डायरेक्‍टर्स और चीफ टेक्‍नोलॉजिकल अफसरों को ब्‍लूप्रिंट तैयार करने को कहा है।

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