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PSU बैंकों का प्राइवेटाइजेशन जरूरी, तेजी से कम हो रहा है मार्केट शेयर: नंदन नीलेकणी

इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणी का कहना है कि इससे पहले की देरी हो जाए, सरकारी बैंकों को प्राइवेटाइजेशन जरूरी है।

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मुंबई। इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणी का कहना है कि इससे पहले की देरी हो जाए, सरकारी बैंकों को प्राइवेटाइजेशन जरूरी है। नीलेकणी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि पब्लिक सेक्टर बैंकों का मार्केट शेयर धीरे-धीरे कम हो रहा है। अगर इसी लिहाज से पीएसयू बैंक मार्केट लूज करते रहे तो बहुत देर हो जाएगी। उनका कहना है कि यह टैक्सपेयर्स के लिए भी बेहतर है। 

हर साल 4 फीसदी कम हो रहा मार्केट शेयर
नीलेकणी के अनुसार पीएसयू बैंकों का मार्केट शेयर कम होने की जो गति है, वह हर साल 4 फीसदी है। अगर इसी तरह से इनका मार्केट शेयर लूज होता रहा तो शायद 10 साल बाद पीएसयू बैंकों के पास 10 फीसदी ही मार्केट शेयर रह जाए। यह शेयर तब बहुत ही छोटा रह जाएगा। 

 

टेलिकॉम और एयरलाइंस का उदाहरण दिया
नंदन नीलेकणी ने इस मामले में टेलिकॉम और एयरलाइंस सेक्टर का उदाहरण दिया। उनका कहना है कि आज टेलिकॉम सेक्टर में गिने-चुने 4 बड़े प्लेयर्स ही रह गए हैं। ये सभी प्राइवेट प्लेयर्स हैं। वहीं, इस क्षेत्र में सरकारी कंपनी बीएसएनएल का मार्केट शेयर बहुत छोटा रह गया है। इसी तरह से एयरलांइस में सभी बड़े प्लेयर्स प्राइवेट हैं और एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन की बात हो रही है। 

 

बैंकिंग सेक्टर में बढ़ा टेक्नोलॉजी का रोल
नीलेकणी के अनुसार अभी पीएसयू बैंकों का मार्केट शेयर 70 फीसदी है। ऐसे में यह प्राइवेटाइजेशन का सही समय है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में धीरे-धीरे टेक्नोलॉजी का रोल बए़ रहा है। बैंकिंग बिजनेस में ग्रोथ के लिए टेक्नोलॉजी का रोल अहम होता जा रहा है। ऐसे में इसके लिए भी अच्छे टैलेंट की जरूरत है, जो पीएसयू बैंक सेक्टर के लिए आसान नहीं है। यह एक कारण भी है, जिसकी वजह से प्राइवेटाइजेशन बहुत जरूरी है। 

 

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