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ICICI लोन विवाद : धूत बोले मैं पैनल में सभी को जानता था, लेकिन यह कोई अपराध नहीं

आईसीआईसीआई बैंक लोन विवाद पर वेनुगोपाल धूत ने कहा है कि व्‍यक्ति जान पहचान का मतलब कोई आपराधिक कृत्‍य नहीं है।

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मुम्‍बई. आईसीआईसीआई बैंक से वीडियोकान ग्रुप को मिले लोन विवाद के बीच वेनुगोपाल धूत ने कहा है कि व्‍यक्ति जान पहचान का मतलब यह नहीं है कि कोई आपराधिक कृत्‍य नहीं है। वीडियोकान ग्रुप के चेयरमैन धूत ने कहा कि जिस 12 सदस्‍यीय टीम ने लोन पास किया था मैं उन सभी को जनता हूं।

 

 

3250 करोड़ के लोन का विवाद

आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर पर आरोप है कि उन्‍होंने गलत तरीक से वीडियोकान को 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया, जो बाद में एनपीए हो गया। हालांकि बाद में बैंक के बोर्ड ने बयान जारी कर कहा था कि पूरे मामले की बैंक ने अपने स्‍तर पर जांच की है और इसमें किसी भी तरह की अनियमितता नहीं है।

 

चंदा कोचर के पति की कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप

आरोप है कि इस लोन से चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को फायदा पहुंचाया गया है। आरोप है कि वीडियोकान ग्रुप ने यह पैसा नुपॉवर रिन्‍यूबल्‍स में डाला, जो चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी बताई जा रही है। धूत ने इस मामले में चंदा कोचर के सवाल पर कहा है कि इस मामले में कुछ भी गलत नहीं हुआ है।

 

मैं सभी को जानता था

धूत ने कहा कि जिस 12 सदस्‍यीय कमेटी ने लोन पास किया उसमें चंदा सहित सभी 12 सदस्‍यों को मैं जानता हूं। यही नहीं मैं उस वक्‍त के बैंक चेयरमैन केवी कामथ को भी जानता था। इस कमेटी ने ही वीडियोकान को 3250 करोड़ रुपए का लोन पास किया था। उन्‍होंने कहा कि दो लोगों के आपसी संबंध होने का मतलब यह नहीं है कि यह कोई अपराध है। धूत ने यह बातें एक मराठी चैनल को दिए इंटरव्‍यू में कहीं हैं।

 

सीबीआई ने शुरू की जांच

इस मामले की सीबीआई जांच के बारे में पूछने पर उन्‍होंने कहा कि एजेंसी सभी आरोपों की जांच करेगी जो उसको सौंपे गए है। उनके हिसाब से यह एक बोगस शिकायत है। इससे पहले धूत ने कहा था कि यह लोन मैरिट के हिसाब से दिया गया था।

 

 

आगे पढ़ें : मामले का पर्दाफाश करने वाले के आरोप

 

 

 

अरविंद मानते हैं कोचर को जिम्‍मेदार

वहीं दूसरी जिस शख्‍स के आरोप पर यह जांच शुरू हुई है उसका कहना है कि इस मामले में बहुत कुछ सामने आएगा। अरविंद गुप्ता ही वह शख्स हैं, जिन्होंने सीधे तौर पर प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर पर लोन देने में मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि कोचर ने अपने पति को फायदा पहुंचाने के लिए बैंक के जरिए वीडियोकॉन ग्रुप को लोन दिलवाया। इस वजह से बैंक का 3250 करोड़ रुपए का लोन एनपीए हो गया है। गुप्ता का कहना है कि इस वजह से इन्वेस्टर्स को नुकसान हुआ है। ऐसे में चीजें क्लीयर होनी चाहिए। गुप्ता के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने साल 2016 में ही पीएमओ, आरबीआई, सेबी सहित सभी को लेटर भी लिखा, लेकिन उन्हें कहीं से जवाब नहीं मिला। moneybhaskar.com के Mahendra Singh ने गुप्ता से पूरे मसले पर विस्तार से बात की है। प्रमुख अंश:

 

मिलीभगत से डूबा पैसा

अरविंद गुप्‍ता का कहना है कि इस मामले में पैसा बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत से डूबा है। इस पैसे की भरपाई कौन करेगा। यह आम जनता का पैसा है। शेयर होल्‍डर को नुकसान हुआ है । आम आदमी का भरोसा कैसे बहाल होगा।

 

 

  आखिर पैसा डूबने के लिए कौन जिम्‍मेदार

अरविंद गुप्‍ता ने कहा कि एक कंसोर्टियम ने ग्रुप को 40,000 करोड रुपए का लोन दिया कि कंपनी चल जाएगी और पैसा वापस मिल जाएगा। कंसोर्टियम का पैसा भी वापस नहीं आया और आईसीआईसीआई बैंक का पैसा भी डूब गया। पूरा पैसा एनपीए हो गया इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है। आईसीआईसीआई बैंक का बोर्ड कह रहा है कि हमारा लोन देने का इंटरनल सिस्‍टम बहुत रोबस्‍ट है। इस रोबस्‍ट सिस्‍टम का क्‍या फायदा, जब बैंक का पैसा डूब गया। आप अपने आपको पाक साफ बता रहे हैं। आपने कोई ऐसी बात कही जिससे लगे कि बैंक में रखा आम आदमी का पैसा सुरक्षित है या शेयर होल्‍डर का हित सुरक्षित है।

 

 

बेगुनाह हैं तो एनसीएलटी में जाकर साबित करें

अगर आईसीआई बैंक का प्रबंधन को लगता है कि वे बेगुनाह हैं तो वे एनसीएलटी में जाकर अपनी बेगुनाही साबित करें। वे इस मामले में ऐसे अपने आपको पाक साफ साबित नहीं कर सकते हैं।

 

 

सरकार कराए जांच

मैने इस मामले को दो साल पहले सरकार के सामने रखा था। मैने सरकार से कहा था कि ये आंकड़े हैं जो बताते हैं कि गलत हो रहा है। आप इसकी जांच कराएं। कई बार रिमाइंडर देने के बाद भी सरकार ने कुछ नहीं किया। मेरी सरकार से एक बार फिर से अपील है कि आप इस मामले की जांच करा लें, अगर आरोप गलत निकलते हैं तो मैं अपनी गलती मान लूंगा कि मैंने जो आंकड़े रखे हैं वे गलत है।

 

 

कानून का करना होगा सामना

सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के तहत प्राइवेट सेक्‍टर के बैंक के इम्‍पलाई भी पब्लिक सर्वेट हैं। ऐसे में अगर उनकी इस मामले में मिलीभगत सामने आती है तो उनको करप्‍शन के मामले में कानून का सामना करना होगा। वे इससे बच नहीं सकते हैं।

 

 

कौन हैं अरविंद गुप्‍ता

अरविंद गुप्‍ता वीडियोकॉन ग्रुप और आईसीआईसीआई बैंक दोनों में शेयर होल्‍डर हैं। अरविंद गुप्‍ता इंडियन इन्‍वेस्‍टरर्स प्रोटेक्‍सन काउंसिल के ट्रस्‍टी भी हैं।

 

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