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पब्लिक सेक्टर के बैंकों के रेग्युलेशन में RBI के अधिकारों पर चर्चा के लिए तैयार सरकारः गोयल

सरकार अपने स्वामित्व वाले बैंकों को रेग्युलेट करने के मामले में RBI के अधिकारों में कमी के मुद्दे पर चर्चा को तैयार है।

Govt open to discuss RBI's power over regulating PSBs: Goyal

 

मुंबई. वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि सरकार अपने स्वामित्व वाले बैंकों को रेग्युलेट करने के मामले में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के अधिकारों में कमी के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है। दरअसल वह हाल में आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे।

 

 

आरबीआई गवर्नर ने उठाया था मामला

हाल में 13,500 करोड़ रुपए के पीएनबी स्कैम के क्रम में सरकार के स्वामित्व वाले बैंकों की रेग्युलेटरी निगरानी को लेकर आरबीआई पर सवाल उठने के बाद पटेल ने उनको कंट्रोल करने में अधिकारों की कमी को जिम्मेदार ठहराया था।

 

 

सरकारी बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी घटाने की योजना नहीं

एक इंडस्ट्री इवेंट में गोयल ने कहा, ‘सरकारी बैंकों के रेग्युलेशन से जुड़े आरबीआई के सभी इश्यूज पर सरकार उसके साथ चर्चा के लिए तैयार है।’ वित्त मंत्री ने सरकारी बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी घटाने की बात को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि 20 सरकारी बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम किए जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

उनका यह बयान इसलिए भी अहम है, क्योंकि बैंकिंग और एलआईसी यूनियंस संकटग्रस्त आईडीबीआई बैंक में एलआईसी के हाथों में अपनी मेजॉरिटी स्टेक बेचे जाने का विरोध कर रही हैं।

 

 

ऊंचे स्टैंडर्ड्स बरकरार रखने में नाकाम रहे बैंकरः गोयल

उम्मीदों को पूरा करने में बैंकिंग सिस्टम की नाकामी की बात को स्वीकार करते हुए गोयल ने कहा कि बैंकर्स ऊंचे स्टैंडर्ड्स और इथिक्स को बरकरार रखने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पर्याप्त कैपिटल के साथ सभी सरकारी बैंकों को पटरी पर लाएगी।  

उन्होंने माना कि सरकारी बैंक राजनीतिक दखलंदाजी का सामना करते रहे हैं, हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस सरकार में कोई भी भी मंत्री लेंडर्स के ऑपरेशन से जुड़े मामलों में दखलंदाजी नहीं कर रहा है।

 

 

लिक्विडेशन सभी एनपीए का समाधान नहीं

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही सुनील मेहता पैनल ने एक एसेट मैनेजमेंट कंपनी बनाने की सिफारिश की है, जो 500 करोड़ रुपए तक के छोटे लोन डिफॉल्ट के समाधान के लिए बैड बैंक के तौर पर काम करेगी। इस संबंध में गोयल ने कहा कि लिक्विडेशन सभी एनपीए का मर्ज नहीं हो सकता, क्योंकि बिजनेस फेल होने के वास्तविक मामले भी होते हैं जिनका समाधान निकाले जाने की जरूरत होती है।

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