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बिना मंजूरी टियर-1 बॉन्ड जारी नहीं कर सकेंगे बैंक, सरकार का निर्देश

अब पब्लिक सेक्टर के बैंकों को टियर-1 बॉन्ड जारी करने से पहले सरकार की मंजूरी लेनी होगी।

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नई दिल्ली. अब पब्लिक सेक्टर के बैंकों को टियर-1 बॉन्ड जारी करने से पहले सरकार की मंजूरी लेनी होगी। घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि इस संबंध में फाइनेंस मिनिस्ट्री ने बैंकों को निर्देश जारी किए हैं। मिनिस्ट्री ने कहा है कि बैंकों को बेसिल-3 कंप्लायंट टियर-1 बॉन्ड जारी करने से पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी। अभी तक पब्लिक सेक्टर की बैंकों को ये बॉन्ड्स जारी करने से पहले मिनिस्ट्री को सिर्फ 'सूचना' देनी होती थी।

 

बैंकों पर नहीं पड़ेगा खास असर

पंजाब एंड सिंध बैंक के रिटायर्ड सीजीएम जी एस बिंद्रा ने कहा कि सरकार के इस फैसले का खास असर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि टियर-1 बॉन्ड के लिए बैंक पहले अपने बोर्ड से मंजूरी लेते थे और सरकार को इस बारे में सूचना देते थे। अब उन्हें इन बॉन्ड के लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी। यह एक औपचारिक कदम है और सरकार भी जानती है कि बैकों को रीकैप प्लान के लिए पूंजी की जरूरत है।

 

 

बॉन्ड्स के साथ जुड़ी हैं कई जटिलताएं

अधिकारी ने कहा, 'सरकार चाहती है कि पीएसयू बैंक अतिरिक्त टियर-1 पर बॉन्ड जारी करने से पहले उससे मंजूरी लें, क्योंकि ऐसे बॉन्ड्स के साथ कैपिटल और इक्विटी संबंधी जटिलताएं जुड़ी हुई हैं।'

बेसिल-3 नॉर्म्स के मुताबिक यदि बैंक का कॉमन इक्विटी टियर-1 रेश्यो 31 मार्च, 2019 से पहले 5.5 फीसदी से नीचे और उसके 6.125 फीसदी से नीचे रह जाता है तो टियर-1 बॉन्ड राइट-ऑफ किया जा सकता है। वैकल्पिक तौर पर ऐसी स्थिति में इन बॉन्ड्स को कॉमन इक्विटी शेयर्स में भी तब्दील किया जा सकता है, जिसे रिजर्व बैंक द्वारा प्वाइंट ऑफ नॉन वायबिलिटी माना गया है और उसी रूप में बताया गया है।

 

 

सरकार पर अतिरिक्त कैपिटल देने की जिम्मेदारी

अधिकारी ने कहा, 'यदि बैंक प्रॉफिटेबल नहीं है और पर्याप्त रिजर्व नहीं है, तो सरकार के ऊपर अतिरिक्त कैपिटल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी होती है।'

इन बॉन्ड्स पर कूपन के पेमेंट के लिए रिजर्व बैंक के कैपिटल नॉर्म्स के अनुपालन की जरूरत होती है। कई बैंक ऊंचे एनपीए के कारण नुकसान का सामना कर रहे हैं, इसे देखते हुए कूपन पेमेंट्स के लिए आरबीआई के नॉर्म्स के अनुपालन के लिए सरकार को पूंजी लगानी पड़ सकती है।

 

 

11 बैंकों पर शुरू हो चुका है प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन

भारी एनपीए और अपर्याप्त कॉमन इक्विटी टियर-1 कैपिटल के कारण आरबीआई पहले ही 11 पब्लिक सेक्टर के बैंकों पर प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन की शुरुआत कर चुका है।

 

 

क्या होते हैं टियर-1 बॉन्ड्स

-टियर-1 बॉन्ड को परपिचुअल बॉन्ड भी कहा जाता है। इन्हें जोखिम भरा इंस्ट्रूमेंट माना जाता है, क्योंकि पर्याप्त प्रॉफिट नहीं होने या पर्याप्त डिस्ट्रीब्यूटेबल रिजर्व होने की स्थिति में कूपन पेमेंट से बचने का अधिकार मिल जाता है।

-इन बॉन्ड्स में आम तौर पर 5वें या 10वें साल के अंत में विचार करने का ऑप्शन होता है। इन क्लॉज के चलते रिस्क-प्रीमियम को देखते हुए इन्वेस्टर्स अक्सर हाई-यील्ड की डिमांड करते हैं।

-हालांकि पब्लिक सेक्टर के बैंकों के मामले में इसे सरकार की गारंटी के तौर पर देखा जाता है, क्योंकि किसी तरह के डिफॉल्ट की स्थिति में इसे सॉवरेन डिफॉल्ट माना जाता है। ऐसा आईडीबीआई बैंक के मामले में हुआ था।

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