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स्ट्रेस्ड एसेट से निपटने के लिए 24 बैंकों ने किया एग्रीमेंट, 50 से 500 करोड़ तक के बैड लोन की वसूली होगी तेज

इस एग्रीमेंट के बाद बैंक अपने bad loans की वसूली तेजी से कर सकेंगे।

Around 24 banks sign on new NPA resolution framework

 

मुम्‍बई. स्ट्रेस्ड एसेट से निपटने के लिए करीब दो दर्जन कर्ज देने वाली संस्‍थाओं ने एक समझौता किया है। इस समझौते में शामिल ज्‍यादातर सरकारी बैंक हैं। इन सभी के बीच में इंटर क्रेडिटर्स एग्रीमेंट (ICA) पर हस्‍ताक्षर हुए। इस समझौते के बाद 500 करोड़ रुपए तक के स्ट्रेस्ड एसेट का जल्‍द निपटान किया जा सकेगा।

 

 

सशक्‍त प्रोजेक्‍ट का हिस्‍सा है यह समझौता

यह समझौता सशक्‍त प्रोजेक्‍ट का हिस्‍सा है। पीएनबी के पूर्व चेयरमैन सुनील मेहता की अध्‍यक्षता में एक कमेटी बनी थी, जिसकी सिफारिशों के आधार पर यह योजना बनाई गई थी। इस कमेटी ने जुलाई की शुरुआत में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इस कमेटी में अन्‍य दो सदस्‍यों में SBI के प्रमुख रजनीश कुमार और बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रमुख पीएस जयाकुमार शामिल थे।

 

-इस समझौते के बाद बैंक और अन्‍य वित्‍तीय संस्‍थानों के बीच एक प्‍लेटफार्म तैयार हो जाएगा जो NPA में फंसे पैसों की वसूली में मदद करेगा। इस वक्‍त बैंक और वित्‍तीय संस्‍थानों का करीब 12 फीसदी पैसा बैड लोन के रूप में है। इस समझौते की मदद से बैंक अपने 50 से 500 करोड़ रुपए तक के फंसे हुए लोन की वसूली तेजी से कर सकेंगे।

 

ज्‍यादा बैंक ले चुके हैं बोर्ड से अनुमति

मेहता के अनुसार इंटर क्रेडिटर्स एग्रीमेंट हो चुका है। ज्‍यादातर बैंकों ने अपने बोर्ड से इसकी अनुमति ले ली है और जो बाकी हैं वह यह प्रोसेस तेजी से पूरा कर रहे हैं। इस कदम का उद्देश्‍य फंसे हुए कर्ज की वसूली तेज करना है। उनके अनुसार आज यह ए्ग्रीमेंट 18 सरकारी बैंकों, तीन निजी क्षेत्र के बैंक सहित एग्जिम बैंक ने इस पर साइन किया है। उनके अनुसार अभी कई बैंक और वित्‍तीय संस्‍थान इस समझौते पर साइन करेंगे। यह संस्‍थान अपने बोर्ड से इस सबंध में अप्रूवल लेने की तैयारी में है।

 

जुलाई के अंत तक इस पर शुरू हो जाएगा काम

उन्‍होंने कहा कि जुलाई के अंत यह समझौता आपरेशनल हो जाएगा। उन्‍होंने आशा जताई कि जल्‍द ही सभी बैंक इसका हिस्‍सा बन जाएंगे। मेहता के अनुसार इस समझौते पर विदेशी बैंकों ने अभी साइन नहीं किया है। इसके लिए उन्‍हें अपने बोर्ड से अप्रूवल लेना होगा।

 

बैंकों का फंसा है काफी पैसा

मार्च 2018 तक बैंकों का 50 से लेकर 500 करोड़ रुपए का बैड लोन करीब 3.10 लाख करोड़ रुपए का है। वहीं 50 करोड़ रुपए से कम के लोन में बैंकों का करीब 2.10 लाख करोड़ रुपए फंसा हुआ है।

 

 

 

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