Advertisement
Home » इकोनॉमी » बैंकिंगबैड लोन बेचने के लिए अमेरिका जैसा बने ऑनलाइन प्‍लेटफार्म - Make America style online platform to sell bad loans

बैड लोन बेचने के लिए अमेरिका जैसा बने ऑनलाइन प्‍लेटफार्म, RBI डिप्‍टी गवर्नर ने दिया सुझाव

बैंकों के बैड लोन से निपटने के लिए रिजर्व बैंक चाहता है कि अमेरिका की तरह ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल तैयार किया जाए।

1 of

मुम्‍बई. बैंकों के बैड लोन से निपटने के लिए रिजर्व बैंक चाहता है कि अमेरिका की तरह ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल तैयार किया जाए। अमेरिका में बैड लोन को बेचने के लिए ऑनलाइन प्‍लेटफार्म का इस्‍तेमाल किया जाता है। इससे जहां बैड लोन से जुड़ी प्रॉपर्टी को साफ तरीके से बेचना संभव होता है, वहीं प्रॉपर्टी की बेहतर प्रॉइस डिस्‍कवरी होती है। 

 

और क्या कहा RBI डिप्टी गवर्नर ने?

- रिजर्व बैंक के डिप्‍टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा, "ऐसा ट्रेडिंग प्‍लेटफार्म बैडलोन की बिक्री में मदद कर सकता है। बैड लोन की समस्‍या भारतीय बैंकों को काफी परेशान कर रही है। सभी स्‍टेकहोल्‍डर्स इस व्‍यवस्‍था को बनाने के लिए आगे आएं।"

 

 

बैंक सिस्टम में अभी कितना बैड लोन है?

बैंकिंग सिस्‍टम में इस वक्‍त करीब 10 लाख करोड़ रुपए का बैड लोन है। सितबंर 2017 की तिमाही में इसमें करीब 10.2% की बढ़त हुई है। बैड लोन की बढ़ती समस्‍या को देखते हुए आरबीआई ने पिछले दिनों 40 बड़े डिफाल्‍टर्स के मामले डेब्‍ट रिकवरी ट्रिब्‍यूनल के पास भेजने का निर्देश दिया था। इन 40 बड़े लोन अकाउंट में एस्‍सार स्‍टील, भूषण स्‍टील, भूषण पॉवर, एमटेक ऑटो, वीडियाकॉन सहित जेपी इंफ्रा के अकाउंट शामिल थे। इन कंपनियों पर कुल बैड लोन का करीब 40% पैसा फंसा हुआ है। 

Advertisement

 

अमेरिका ने कब तैयार किया था ये सिस्टम?

- आचार्य ने कहा, "अमेरिका में बैंक एसोसिएशन, एसोसिएशन ऑफ एसेट रिकंस्‍ट्रक्‍शन कंपनीज और क्रेडिट रेटिंग एजेंसीज ने मिलकर इस प्‍लैटफार्म को तैयार किया। इससे लोन सिंडीकेशन एंड ट्रेडिंग एसो‍सिएशन (LSTA) को भी जोड़ दिया गया है। इस सिस्‍टम में लीगल डॉक्‍युमेंट का डिजिटाइजेशन हो जाने से प्रॉसेस आसान हो जाती है। बैंकिंग क्राइसेस के दौरान अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने ऐसा सिस्‍टम तैयार किया था। मेरा आग्रह है कि सभी स्‍टेकहोल्‍डर इस विषय पर सोचें कि ऐसा किया जाना चाहिए या नहीं।" 

Advertisement

 

इस कदम का क्या फायदा होगा?

- उन्‍होंने कहा, "यह बैंकों के हित में है कि प्राइमरी मार्केट में लिक्विडिटी बढ़े और वह लोन बांट सकें, वहीं एसेट रिकंस्‍ट्रक्‍शन कंपनियों के अच्‍छा होगा कि सेकेंडरी मार्केट डेवलप हो। अगर ऐसा प्‍लैटफार्म तैयार होता है तो लोन सेल्‍स केवल रिस्‍क ट्रांसफर जैसा ही मामला रह जाएगा।"

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
Advertisement