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Home » Economy » Banking4 Bankers left post in 2018 including RBI governor Urjit Patel

हजारों करोड़ रुपए संभालते थे ये 4 लोग, पद छोड़ने को हो गए मजबूर

Year Ender: बैंकिंग क्षेत्र में भारी उथल-पुथल का गवाह बना वर्ष 2018

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नई दिल्ली. वर्ष 2018 में बैंकिंग सेक्टर भारी उतार-चढ़ाव का गवाह बना। जहां सरकार और बैंकिंग रेग्युलेटर ने एनपीए (NPA) से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू किया। वहीं कुछ पर अनियमितताओं के आरोप लगे तो कई पर बदले नियमों की गाज गिरी। इसका असर यह हुआ कि देश के चार बड़े बैंकर अपना पद छोड़ने को मजबूर हो गए। इस साल आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल (Urjit Patel) ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हम यहां ऐसे 4 बैंकर्स के बारे में बता रहे हैं…

 

 

1. चंदा कोच्चर पर उठे सवाल

मार्च, 2018 में एक व्हिशलब्लोअर ने देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर के बैंक आईसीआईसीआई (ICICI Bank) की मैनेजिंग डायरेक्टर चंदा कोच्चर (Chanda Kochhar) अनुचित कार्यों का आरोप लगाया। यह इसलिए भी हैरत में डालने वाला आरोप था, क्योंकि इस बैंक के बारे में कहा जाता था कि यहां कुछ भी गलत नहीं हो सकता।

56 वर्षीय कोच्चर पर हितों के टकराव, डिसक्लोजर्स में कमी और वीडियोकॉन (अब दिवालिया हो चुकी) इंडस्ट्री के लिए कर्ज बढ़ाने में लेनदेन के आरोप लगे। इस क्रम में उनके खिलाफ एक अन्य शिकायत भी दर्ज हुई और आखिरकार अक्टूबर में उन्हें बैंक से अलग होना पड़ा। वह बैंक से वर्ष 1984 में मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर जुड़ी थीं।

 

 

 

 

2.शिखा शर्मा को नहीं मिला एक्सटेंशन

देश की चुनिंदा हाई प्रोफाइल बैंकर्स में शामिल शिखा शर्मा (Shikha Sharma) को आरबीआई (RBI) ने एक्सिस बैंक (Axis Bank) में एमडी पद पर एक्सटेंशन देने से इनकार कर दिया। देश के तीसरे बड़े प्राइवेट सेक्टर के बैंक के बोर्ड ने शर्मा का कार्यकाल मई, 2021 तक तीन साल तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया था। हालांकि आरबीआई ने उन्हें 31 दिसंबर, 2018 तक सेवाएं देने की अनुमति दी।

गौरतलब है कि मार्च, 2017 तक दो साल में एक्सिस बैंक (Axis Bank) का एनपीए (NPA) बढ़कर 5 गुना से ज्यादा हो चुका है, वहीं इसी अवधि में बैंक का नेट प्रॉफिट घटकर आधा रह गया है।

 

 

3. राणा कपूर का हटना तय

यस बैंक (Yes Bank) में भी एक बड़ी हस्ती का बाहर होना तय हो गया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यस बैंक (Yes Bank) के सीईओ पद पर राणा कपूर (Rana Kapoor) के कार्यकाल को सीमित कर दिया और उन्हें 31 जनवरी, 2019 तक ही पद पर रहने के लिए कह दिया गया है।

आरबीआई ने यस बैंक (Yes Bank) सहित कई लेंडर्स को बैड लोन की रिपोर्टिंग में ‘डायवर्जन’ यानी किसी तरह के बदलाव का खुलासा करने के निर्देश दिए थे। आरबीआई के मताबिक, 2016-17 में यस बैंक का ग्रॉस एनपीए 8,373.8 करोड़ रुपए रहा था, जबकि उसने 2018 करोड़ रुपए का ग्रॉस एनपीए घोषित किया था।

4.आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल का इस्तीफा

उर्जित पटेल (Urjit Patel) ने 10 दिसंबर को खुद ही अचानक आरबीआई गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया था और इसके पीछे ‘व्यक्तिगत कारणों’ का हवाला दिया था। हालांकि माना जाता है कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता के मुद्दे पर सरकार के साथ चल रहे टकराव के मद्देनजर ही उन्हें इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ा।

 

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