IDBI के निजीकरण में नया पेंच, LIC भी नहीं रख पाएगी इसका मालिकाना हक

IDBI के निजीकरण के विरोध के बीच नया पेंच आ गया है। इसके चलते देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी एलआईसी द्वारा आईडीबीआई बैंक में हाल में खरीदी गई 51% हिस्सेदारी को 3-5 साल में घटाना पड़ सकता है। यानी कि उसे बैंक पर मालिकाना हक गंवाना पड़ेगा। उसकी हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक सीमित की जा सकती है।

 

 

 

money bhaskar

Mar 18,2019 11:48:00 AM IST

नई दिल्ली. IDBI के निजीकरण के विरोध के बीच नया पेंच आ गया है। इसके चलते देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी एलआईसी द्वारा आईडीबीआई बैंक में हाल में खरीदी गई 51% हिस्सेदारी को 3-5 साल में घटाना पड़ सकता है। यानी कि उसे बैंक पर मालिकाना हक गंवाना पड़ेगा। उसकी हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक सीमित की जा सकती है। ऐसे में एलआईसी को घाटा होने की आशंका है।

यह है दिक्कत

बीमा नियामक संस्था इरडा के दिशानिर्देश के मुताबिक कोई भी बीमा कंपनी किसी लिस्टेड कंपनी में 15% से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकती है। रिजर्व बैंक की ओर से भी किसी निजी क्षेत्र के बैंक में प्रमोटर की हिस्सेदारी 15% से अधिक रखने की अनुमति नहीं है। आईडीबीआई के मामले में दोनों रेगुलेटर्स ने विशेष व्यवस्था के तहत एलआईसी को मंजूरी दी थी। लेकिन अब दोनों ही इसे कम करने के पक्ष में है।

एलआईसी चाहती है अपना हक

हाल में इरडा चेयरमैन सुभाष चंद्र खूंटिया ने कहा था कि हम एलआईसी द्वारा आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी घटाने की समय-सीमा तय करेंगे। हमने एलआईसी से इस बारे में प्रस्ताव देने को कहा है। उसके बाद हम इस पर फैसला करेंगे। सूत्रों ने बताया कि एलआईसी ने इस बारे में अपना पक्ष इरडा के सामने रख दिया है। एलआईसी के लिए बैंक में हिस्सेदारी घटाने के लिए वाजिब रिटर्न पाना महत्वपूर्ण पहलू है। सूत्रों के मुताबिक 51% जैसी बड़ी हिस्सेदारी कुछ महीनों में घटाना संभव नहीं है। इसमें लंबा समय लगेगा। अब इस पर नियामक को फैसला करना है।

यह है नुकसान

डेडलाइन तय करने से आईडीबीआई बैंक के शेयर की कीमत प्रभावित हो सकती है। इसलिए इरडा ने एलआईसी को हिस्सेदारी घटाने के बारे में प्रस्ताव देने को कहा था। इरडा ने पिछले साल जून में एलआईसी को कर्ज के बोझ से दबे आईडीबीआई बैंक में 51% हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दी थी। एलआईसी ने 28 दिसंबर को बैंक में 14,500 करोड़ और बाद 21 जनवरी को 5,030 करोड़ डाले हैं। दिसंबर 2018 तिमाही में बैंक का घाटा तीन गुना होकर 4,185.48 करोड़ पर पहुंच गया। एक साल पहले यह घाटा 1,524.31 करोड़ रुपए था। जनवरी में बैंक में इसकी 51% हिस्सेदारी हो गई थी

रिजर्व बैंक आईडीबीआई बैंक का नाम बदलने के पक्ष में नहीं

आरबीआई आईडीबीआई बैंक का नाम बदलने के पक्ष में नहीं है। बैंक के बोर्ड ने पिछले महीने हुई बैठक में नाम बदलकर एलआईसी आईडीबीआई बैंक या एलआईसी बैंक रखने का प्रस्ताव किया था। लेकिन सूत्रों ने कहा, रिजर्व बैंक इसके पक्ष में नहीं है। नाम बदलने के लिए बैंक को आरबीआई के अलावा कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय, शेयरधारकों, स्टॉक एक्सचेंजों आदि से भी मंजूरी लेनी होगी।

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