कभी मोदी के मित्र रहे इस पार्टी नेता ने चला बड़ा दाव, सत्ता में आई तो बनाएगी इस्लामिक बैंक

कभी एनडीए का हिस्सा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मित्र रहे तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) अध्यक्ष एवं  आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने अल्पसंख्यकों को लुभाने के लिए नया दाव चला है। नायडू ने कहा है कि अगर उनकी  पार्टी दोबारा सत्ता में आती है तो मुस्लिमों के कल्याण के लिए इस्लॉमिक बैंक की स्थापना की जाएगी। 

money bhaskar

Apr 06,2019 05:20:00 PM IST

नई दिल्ली. कभी एनडीए का हिस्सा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मित्र रहे तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) अध्यक्ष एवं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने अल्पसंख्यकों को लुभाने के लिए नया दाव चला है। नायडू ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी दोबारा सत्ता में आती है तो मुस्लिमों के कल्याण के लिए इस्लॉमिक बैंक की स्थापना की जाएगी।

दस हजार करोड़ रुपए का फंड बनेगा

श्री नायडू ने टेलीकांफ्रेंस के जरिए पार्टी नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मुस्लिमों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए इस्लॉमिक बैंक की स्थापना की जायेगी। उन्होंने पिछड़े समुदाय के लोगों की सहायता के लिए 10 हजार करोड़ रूपयों के फंड के साथ एक बैंक की स्थापना भी किये जाने का आश्वासन दिया। चुनाव आयोग द्वारा आंध्र प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव का तबादला किये जाने पर असंतोष जताते हुए नायडू ने कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह अधिकारियों के तबादले की आड़ में तेदेपा को चुनाव में नहीं हरा सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी और शाह अच्छी तरह समझ रहे हैं कि तेदेपा चुनाव जीतने जा रही है , इसीलिए वे प्रतिशोधपूर्ण कार्रवाई में लगे हुए हैं। इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग तथा अब चुनाव आयोग का दुरूपयोग किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें - नए साल में आप यह पांच चीजें सीखेंगे तो नौकरी में पाएंगे तरक्की

इस्लामिक बैंक का आइडिया है पुराना


भारत में पहला इस्लामिक बैंक कोच्चि में खुला था जिसमे राज्य की हिस्सेदारी 11% है। ब्याज लेना और देना दोनों ही शरियत के खिलाफ माने जाते हैं। इस्लाम में सूदखोरी को “हराम” माना जाता है। इसलिए सूद से मिले फायदे को गलत माना जाता है। इसलिए अरब देशों की तरह इस्लामिक बैंक की मांग उठती रहती है। इस बैंक में कर्ज की बजाय बाजार से मुनाफा कमाया जाता है।

यह भी पढ़ें - मोदी ने दक्षिण फतह करने के लिए बदला इस मेट्रो सिटी की पहचान रहे रेलवे स्टेशन का नाम

इस्लामिक बैंकिंग क्या होती है ?

यह शरीयत के कानूनों के अनुसार गठित किया गया एक बैंक होता है, जो अपने ग्राहकों के जमा पैसे पर न तो ब्याज देता है और न ही ग्राहकों को दिए गए किसी कर्ज पर ब्याज लेता है। इस्लामिक बैंक अच्छे व्यवहार के आधार पर लोन देता है और कर्ज लेने वाले को सिर्फ मूलधन यानी जितनी रकम ली है उतनी ही लौटानी पड़ती है। अर्थात, लोन पर ब्याज नहीं लिया जाता। इस्लामिक बैंकिंग में बैंक फंड्स के ट्रस्ट्री (रुपये की देखभाल करने वाला) की भूमिका निभाता है। बैंक में लोग पैसे जमा करते हैं और जब चाहें वहां से निकाल सकते हैं। यहां बचत खाता पर ब्याज कमाने की अनुमति नहीं है, लेकिन जब बैंक आपके पैसे से कुछ लाभ कमाती है तो वह इस लाभ का कुछ हिस्सा खाताधारक को भी गिफ्ट के रूप में दे देती है।

यह भी पढ़ें - आप भी यह काम कर बन सकते हैं टॉपर, UPSC महिला टॉपर श्रृष्टि से जानिए सीक्रेट टिप्स

X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.