सालाना महज एक हजार की बचत कर आप भी जुड़ सकते हैं SBI के नेशनल पेंशन सिस्टम से


60 साल की उम्र में किसे चाहत नहीं होती है कि उसके पास बेहतरीन रिटायरमेंट प्लान हो। उसके पास इतना पैसा हो कि वह बाकी की जिंदगी पेंशन के सहारे काट दे। ऐसे ही लोगों के लिए  देश के सबसे बड़ा सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (नेशनल पेंशन सिस्टम) की पेशकश की है।

money bhaskar

Mar 10,2019 04:46:00 PM IST

नई दिल्ली.
60 साल की उम्र में किसे चाहत नहीं होती है कि उसके पास बेहतरीन रिटायरमेंट प्लान हो। उसके पास इतना पैसा हो कि वह बाकी की जिंदगी पेंशन के सहारे काट दे। ऐसे ही लोगों के लिए देश के सबसे बड़ा सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (नेशनल पेंशन सिस्टम) की पेशकश की है। इस स्कीम में महज सालाना एक हजार रुपए की बचत कर आप रिटायरमेंट के बाद सुकून से अपनी जिंदगी गुजार सकते हैं।

सरकार रखती है नजर

केंद्र सरकार के नेशनल पेंशन सिस्टम पर नियंत्रण पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) की ओर से किया जाता है। इसमें बाजार आधारित निवेश को बढ़ावा दिया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे वक्त के लिए इक्विटी आधारित निवेश के चयन का फैसला अच्छा साबित होता है। इसमें रिटर्न 12 से 14 फीसदी तक मिल पाता है। जबकि दूसरी स्कीमों में रिटर्न महज 8 प्रतिशत तक होता है।

...पर यह जानकारी जरूर जान लें

1. एनपीएस में आमतौर पर दो तरह के खाते खोले जाते हैं, एक टियर-1 और दूसरा टियर-2। टियर-1 अकाउंट पूरी तरह से पेंशन अकाउंट होता है, जिसमें निकासी की अनुमति नहीं होती है, वहीं टियर-2 अकाउंट को निवेश अकाउंट के रुप में जाना जाता है जिसमें निकासी की अनुमति मिलती है। यह जानकारी एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज है।
2. बैंक के मुताबिक सब्सक्राइबर्स को न्यूनतम योगदान के रुप में एक साल के भीतर टियर-1 खाते में कम से कम 1000 रुपये का निवेश करना होता है। जबकि टियर-2 खाते में न्यूनतम निवेश की अनिवार्यता लागू नहीं होती है।
3. एनपीएस पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से पेंशन फंड मैनेजर (पीएफएम) पर निर्भर करता है जिसका चयन खाताधारक करता है। खाताधारक को एक वित्त वर्ष के दौरान एक बार अपने पीएफएम को बदलने की अनुमति होती है।
4. एसबीआई की वेबसाइट के मुताबिक एनपीएस खाते में 60 वर्ष तक की आयु के लिए लॉक हो जाता है। 60 वर्ष से पहले निकासी की अनुमति होती है लेकिन इस स्थिति में 80 फीसद कॉर्पस को एन्युटी में निवेश करना होता है, यह टैक्स फ्री निकासी होती है।
5. एनपीएस के टियर-1 खाते में टैक्स बेनिफिट्स की सुविधा मिलती है जबकि टियर-2 खाते में ऐसी कोई सुविधा नहीं दी जाती है।

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