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रिजर्व बैंक के 28,000 करोड़ रुपए के फंड के लिए सरकार को करना होगा इंतजार, 18 फरवरी को होगा फैसला

सरकार का यह रवैया नहीं आ रहा है वित्तीय संस्थाओं को रास

RBI Will Not Immediately Transfer Reserves To Govt

Reserve Bank Funds: सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से 27,380 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने की मांग की थी। यह वहीं फंड है, जिसे RBI ने पिछले कुछ वर्षों में जोखिम और आरक्षित फंड के तौर पर रखा था। रिजर्व बैंक ने कहा है कि वह इस फंड काे तुरंत ट्रांसफर नहीं करेगा। रिजर्व बैंक की ऑडिट कमेटी ने इस वित्तीय वर्ष के सीमित ऑडिट के आधार पर 28,000 करोड़ रुपए का अंतरिम लाभांश सरकार को देना तय किया था, लेकिन 18 फरवरी काे होने वाले बैंक की बोर्ड मीटिंग में इस बात की घोषणा की जाएगी।

नई दिल्ली.

सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से 27,380 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने की मांग की थी। यह वहीं फंड है, जिसे RBI ने पिछले कुछ वर्षों में जोखिम और आरक्षित फंड के तौर पर रखा था। रिजर्व बैंक ने कहा है कि वह इस फंड काे तुरंत ट्रांसफर नहीं करेगा। रिजर्व बैंक की ऑडिट कमेटी ने इस वित्तीय वर्ष के सीमित ऑडिट के अाधार पर 28,000 करोड़ रुपए का अंतरिम लाभांश सरकार को देना तय किया था, लेकिन 18 फरवरी काे होने वाले बैंक की बोर्ड मीटिंग में इस बात की घोषणा की जाएगी।

 

वित्तीय संस्थाएं हैं नाखुश

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स की तरफ से की गई यह मांग उन कई मांगों में से एक है जिसे SEBI समेत कई वित्तीय संस्थाएं सरकार की दखलंदाजी मान रही हैं। खासतौर से जब इसके चलते उर्जित पटेल को आरबीआई गवर्नर के पद से इस्तीफा देने का मजबूर होना पड़ा, क्योंकि सरकार ने बैंक को दिशा-निर्देश देने की बात कही थी।

 

बिपिन जालान कमेटी रिपोर्ट

सरकार ने RBI से मांग की थी कि वह अपने अतिरिक्त रिजर्व्स को सरकार को सौंप दे, जिसे RBI ने मानने से मना कर दिया था और कैपीटल फ्रेमवर्क के मुद्दे को बिमल जालान के नेतृत्व वाली कमेटी को सांप दिया गया था। इसके बाद सरकार ने RBI से कैपीटल सरप्लस ट्रांसफर करने की मांग की। सरकार का मानना है कि केंद्रीय बैंक के पास उसके साथ बैंकों से कहीं ज्यादा रिजर्व्स हैं। जालान कमेटी 31 मार्च तक अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।

 

RBI है चिंतित

अंतरिम बजट के बाद इकोनॉमिक अफेयर्स के सेक्रेटरी सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा था कि सरकार आरबीआई से 28,000 करोड़ रुपए मांग रही है। इससे पहले रिजर्व बैंक सरकार को 40,000 करोड़ रुपए का सरप्लस दे चुका है। जालान कमेटी को यह जिम्मा सौंपा गया है कि वह तय करे कि कितना फंड रिजर्व बैंक को सरकार को सौंपना चाहिए। कमेटी अपनी रिपोर्ट 31 मार्च तक सौंपेगी। RBI का मानना है कि इस रिपोर्ट के आए बिना ही पिछले साल के रिजर्व्स को ट्रांसफर करना गलत है।

 

2018-19 में सरकार को 40 हजार करोड़ रुपए ट्रांसफर

रिजर्व बैंक ने 2016-17 के दौरान जोखिम और आरक्षित भंडार के रूप में 13,190 करोड़ रुपए अपने पास रखे थे। वहीं 2017-18 में उसने 14,190 करोड़ रुपए रखे। इस तरह आरबीआई के पास कुल 27,380 करोड़ रुपए की राशि है। वित्त वर्ष 2018-19 में सरकार को रिजर्व बैंक से पहले ही 40,000 करोड़ रुपए मिल चुके हैं। यदि आरबीआई का केंद्रीय बोर्ड अंतरिम लाभांश के रूप में सरकार के 28,000 करोड़ रुपए के अनुरोध को स्वीकार कर लेता है तो केंद्रीय बैंक द्वारा 2018-19 में कुल अधिशेष ट्रांसफर 68,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।

 

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