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प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी योजना बैंकों के लिए बनी मुसीबत, डूब सकते हैं 11 हजार करोड़ रुपए

केंद्रीय बैंक ने सरकार को दी चेतावनी

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी मुद्रा योजना को देश की स्मॉल स्केल इंडस्ट्री को बढ़ावा के सुगम कर्ज मुहैया कराने और छोटे कारोबार की साहूलियत के लिए शुरू की गई थी। लेकिन अब यह योजना बैंकों के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। सूत्रों के मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त मंत्रालय को चेतावनी दी है कि मुद्रा लोन नॉन-परफॉर्मिंग असेट (एनपीए) का अगला बड़ा कारण बन सकता है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 'बैड लोन्स' 11,000 करोड़ रुपए तक पहुंच चुके हैं। इनसे बैंकिंग सिस्टम को काफी नुकसान हो रहा है। पहले से ही सरकारी बैंकों का एनपीए 10 लाख करोड़ रुपए पहुंच चुका है। आरबीआई का कहना है कि मुद्रा लोन के चलते एनपीए से बैंकिंग व्यवस्था के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

 

अब तक बांटा गया है 2.46 लाख करोड़ रुपए का कर्ज

रिजर्व बैंक ने बताया है कि 2017-2018 में आई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2018 में इस स्कीम के तहत कुल 2.46 लाख करोड़ रुपए का कर्ज बांटा गया है। योजना के तहत दिए गए कुल कर्ज में 40 प्रतिशत महिला उद्यमियों को दिया गया, जबकि 33 प्रतिशत सोशल कैटिगरी में बांटा गया। वित्तीय वर्ष 2017-2018 के दौरान प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 4.81 करोड़ रुपए से ज्यादा का फायदा छोटे कर्जदारों को पहुंचाया गया।

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2015 में हुई शुरुआत

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत 8 अप्रैल, 2015 को हुई थी। इस स्कीम के तहत बैंक छोटे उद्यमियों को 10 लाख रुपये तक का लोन दे सकते हैं। लोन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 'शिशु' कैटिगरी में 50,000 रुपये, 'किशोर' कैटिगरी में 50,001 रुपये से 5 लाख रुपये और 'तरुण' कैटिगरी में 5,00,001 रुपये से 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है।

 

 

पहले से ही लड़खड़ाई हुई है वित्तीय व्यवस्था

आरबीआई की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब देश की वित्तीय व्यवस्था IL&FS संकट के चलते लड़खड़ाई हुई है और इससे बैंकों को नुकसान हुआ है। इस कड़ी में ताजा मामला इंडसइंड बैंक का है। IL&FS ग्रुप पर 91 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। इसे अभी नकदी संकट का सामना करना पड़ रहा है। 91 हजार करोड़ रुपए के कर्ज में सिर्फ IL&FS के खाते में करीब 35 हजार करोड़ रुपए जबकि इसकी फाइनैंशल सर्विसेज कंपनी पर 17 हजार करोड़ रुपए बकाया है। गौरतलब है कि ग्रुप पर 57 हजार करोड़ रुपए बैंकों का बकाया है और इसमें अधिकांश हिस्सेदारी सार्वजनिक बैंकों की है।

 
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