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नीरव मोदी से 13,000 करोड़ तो दूर एक साल में 1300 करोड़ भी नहीं वसूल सका पंजाब नेशनल बैंक

PNB के सीएमडी ने पिछले साल छह महीने में रिकवरी करने का दावा किया था

Punjab National Bank could not recover 1300 crores in a year after from Nirav Modi

Punjab National Bank could not recover 1300 crores in a year after from Nirav Modi: पिछले साल अप्रैल के दौरान पीएनबी के सीएमडी सुनील मेहता ने अपने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि वह छह माह में 13,000 रुपए की रिकवरी कर लेंगे। लेकिन एक साल बीतने के बाद अभी तक 1300 करोड़ रुपए की वसूली भी नहीं हो पाई है।

राजीव कुमार

नई दिल्ली। डायमंड कारोबारी नीरव मोदी (Nirav Modi) से 13,000 करोड़ की वसूली तो दूर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) पिछले एक साल में नीरव मोदी से 1300 करोड़ रुपए की भी वसूली नहीं कर पाया है। पिछले साल अप्रैल के दौरान पीएनबी के सीएमडी सुनील मेहता ने अपने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि वह छह माह में 13,000 रुपए की रिकवरी कर लेंगे। पेश हैं दैनिक भास्कर को दिए उनके इंटरव्यू के कुछ अंश...

प्रश्नः घोटाले  से जुड़े 13,000 करोड़ रुपए की रिकवरी कब तक कर लेंगे?
उत्तरः मुझे उम्मीद है कि हम छह माह में इस रकम की रिकवरी कर लेंगे, इस दिशा में हमने काम करना शुरू कर दिया है। आपको बता दे कि पीएनबी बैंक बहुत पुराना बैंक है, उस हिसाब से यह समस्या बड़ी है, लेकिन बैंक के साइज के हिसाब से इतनी भी बड़ी नहीं है।

प्रश्नः कैसे कर लेंगे, नीरव मोदी व मेहुल चौकसी से जब्त संपत्ति को भी नीलाम करने में वर्षों लग जाएंगे?
उत्तरः हम अपने अन्य सोर्स से 13,000 करोड़ की रिकवरी करेंगे। एनपीए व अन्य संपत्ति से हमारे पैसे आएंगे और भी कई सोर्स है। हमारा लीगल सिस्टम अब काफी फास्ट हो गया है इसलिए नीरव मोदी की संपत्ति की नीलामी भी जल्दी हो जाएगी।

नीरव से पहले भी डायमंड कारोबारी बैंकों को लगा चुके हैं चूना
डायमंड कारोबारी द्वारा बैंकों को चूना लगाने का मामला नया नहीं है। नीरव मोदी व मेहुल चौकसी से पहले भी इस प्रकार की घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2014 में जतिन मेहता नामक डायमंड कारोबारी 15 बैंकों के समूह को 6581 रुपए का चूना लगाकर चंपत हो गया। इस समूह में पंजाब नेशनल बैंक भी शामिल था। सरकारी एजेंसी सीबीआई छानबीन करती रही, लेकिन एक पैसे की रिकवरी नहीं हुई। जांच एजेंसियों के मुताबिक, विनसम डायमंड एवं सूरज डायमंड ब्रांड के नाम से कारोबार करने वाला मेहता के पास अब फेडरेशन ऑफ सेंट किट्स एवं नेविस की नागरिकता है। इस कैरिबियन आइलैंड पर निवेश करके नागरिकता ली जा सकती है। इनके साथ भारत का कोई प्रत्यर्पण संधि भी नहीं है जिसके तहत मेहता को भारत लाने की कवायद शुरू की जा सके। इस आइलैंड की नागरिकता लेने वाले नागरिक को एक ऐसा पासपोर्ट दिया जाता है जिसके द्वारा वह नागरिक 10 देशों का भ्रमण बिना वीजा कर सकता है। सरकार की तरफ से जारी विलफुल डिफॉल्टर की सूची में जतिन मेहता का नाम दूसरा है। 9000 करोड़ रुपए के घोटाले के साथ पहला नाम विजय माल्या का है। बताया जाता है कि मेहता अब यूके में अपना कारोबार करता है और दुबई, सिंगापुर, यूरोप के कई देशों में धड़ल्ले से भ्रमण करता है।

एसबीआई के नेतृत्व वाले 25 बैंकों के समूह का ठग लिया श्री गणेश ज्वैलरी हाउस ने
कोलकाता आधारित श्रीगणेश ज्वैलरी हाउस ने 25 बैंकों के समूह को ठगा था। 2223 करोड़ रुपए की ठगी करके इसके मालिक निलेश पारीख को पिछले साल ही विदेश से वापस आते समय गिरफ्तार किया गया। पारीख भी बैंकों को ठगने के बाद आसानी से विदेश जाने में कामयाब हो गया था। पारीख हांगकांग, सिंगापुर एवं यूएई में शेल कंपनियों को निर्यात करता था। इसके आधार पर अपने टर्न ओवर को अधिक दिखाकर बैंकों को ठगता रहा। पारीख के खिलाफ मामले की जांच चल रही है।

आपस में ही कारोबार कर दिखा देते हैं टर्नओवर फिर लेते हैं लोन
जेम्स व ज्वैलरी निर्यातकों ने बताया कि बैंकों को चूना लगाने वाले कारोबारी आपस में रिश्तेदारों के बीच ही निर्यात-आयात का कारोबार करके अपने टर्नओवर को बड़ा कर लेते हैं। एक निर्यातक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जतिन मेहता भी ऐसा ही करता था। उदाहरण के लिए उन्होंने बताया कि ऐसे कारोबारी भारत से किसी माल को दुबई भेजते हैं। जिस कंपनी को हीरे का निर्यात किया जाता है, वह कंपनी भी उनके किसी रिश्तेदार या परोक्ष रूप से उनका ही होता है। फिर वहां से उसे किसी और देश में भेज दिया जाता है। उस देश से यह माल फिर से भारत में उसी कंपनी के पास आ जाता है। इस प्रकार की चौकड़ी से भारत की इस डायमंड कंपनी का टर्नओवर बड़ा हो जाता है और उनकी कर्ज लेने की सीमा बढ़ जाती है। फिर बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से ये आसानी से बैंकों को चूना लगाने में कामयाब हो जाते हैं।

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