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PNB ने ये क्‍या कि‍या ! जि‍सपर लगा है बैन उसे सौंप दी जांच

पंजाब नेशनल बैंक ने 11400 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच का जिम्‍मा प्राइस वाटरहाउस कूपर्स (PwC) को सौंप दि‍या है।

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नई दि‍ल्‍ली।  पंजाब नेशनल बैंक ने 11400 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच का जिम्‍मा प्राइस वाटरहाउस कूपर्स  (PwC) को सौंप दि‍या है। पीडब्‍लूसी से कहा गया है कि‍ वह नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के खि‍लाफ ऐसे सबूत जुटाएं, जि‍न्‍हें कोर्ट में पेश कि‍या जा सके।  एक अंग्रेजी अखबार के मुताबि‍क, पीएनबी ने 17 फरवरी को 15 बिंदुओं वाला स्‍कोप ऑफ वर्क डॉक्‍युमेंट जारी कि‍या है। बैंक ने PwC से कहा है कि‍ वह इस बात का पता लगाए कि‍ कैसे मोदी ने लैटर ऑफ अंडरटेकिंग के सिस्‍टम का मि‍सयूज कि‍या। पैसा कहां, कैसे और आखि‍र में कि‍सके पास गया। इसके अलावा यह भी कैलकुलेट करने को कहा गया है कि‍ इस फ्रॉड की वजह से बैंक को कुल कि‍तना नुकसान उठाना पड़ा।  मगर यहां एक बात नोट करने लायक ये है कि‍ इसी साल जनवरी में सेबी ने प्राइस वाटरहाउस कूपर्स  (PwC) पर दो साल का बैन लगा दि‍या था और उसे ही पीएनबी ने फ्रॉड की जांच का जि‍म्‍मा सौंप दि‍या। आगे पढ़ें 

सेबी ने लगाया है बैन 
करोड़ों के सत्‍यम कंप्‍यूटर्स घोटाले में दोषी पाए जाने पर सेबी ने 10 जनवरी को प्राइस वाटरहाउस (PW) पर दो साल तक के  लि‍ए लि‍स्‍टेड कंपनियों को ऑडि‍ट सेवा देने पर रोक लगा दी  थी।  दो PW पार्टनर्स पर तीन साल का बैन लगाया गया है। इसके अलावा सेबी ने प्राइस वाटरहाउस और उसके दो चार्टर्ड एकाउंटेंट - एस गोपालकृष्‍णन व श्रीनि‍वास तल्‍लूरी को गैर कानूनी ढंग से कमाए गए 13 करोड़ रुपए लौटाने का आदेश भी दि‍या था।  आगे पढें क्‍यों लगा था बैन 

 

ऑडिटर्स ने गलत कि‍या 
आदेश में कहा गया था कि‍ कोई भी लि‍स्‍टेड कंपनी या सेबी से रजि‍स्‍टर्ड इंटरमिडेरी दो साल के लि‍ए ऐसी कि‍सी ऑडिट फर्म को अपने काम में एंगेज नहीं करेंगी जो प्राइस वाटरहाउस  से जुड़ी हों।  इस 108 पेज के आदेश में सेबी के पूर्णकालि‍क सदस्‍य जी महालिंगम ने कहा, मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि ऑडिटर्स इस बात को साबि‍त करने में नाकाम रहे कि उन्‍होंने अपना काम उस प्रोफेशनल ईमानदारी के साथ कि‍या, जि‍सकी जरूरत थी। ऑडि‍टर्स इस बात से परि‍चि‍त थे कि उनकी इस नजरअंदाजी आगे चलकर एक बहुत बड़ी धोखाधड़ी बन जाएगी। इस मामला 2009 का है जब सत्‍यम कंप्‍यूटर सर्वि‍सेज के चेयरमैन बी रामलिंगा राजू ने इस बात को स्‍वीकार कि‍या कि कंपनी के खातों में करीब 54 अरब रुपए की हेराफेरी की गई थी। इस खुलासे के बाद सेबी ने मामले में जांच बैठाई और प्राइस वाटरहाउस व उससे जुड़ी अन्‍य फर्म को फरवरी 2009 में नोटि‍स जारी कि‍या।  

 

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