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कर्मचारियों के फ्रॉड पर बैंक बढ़ा सकते हैं इंश्‍योरेंस कवर, PNB घोटाले से दबाव में

फ्रॉड से परेशान बैंक अब इंप्‍लॉइज द्वारा किए जाने वाले फ्रॉड के लिए इंश्‍योरेंस कवर बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

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नई दिल्‍ली. बैंकिंग सेक्‍टर में बड़ी संख्‍या में हो रहे फ्रॉड से परेशान बैंक अब अपने इंप्‍लॉइज की गलतियों से होने वाले फ्रॉड के लिए इंश्‍योरेंस कवर बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। 

एक सरकारी बैंक के अधिकारी ने कहा कि PNB में 11,400 करोड़ रुपए और OBC में 390 करोड़ रुपए के इतने बड़े पैमाने के फ्रॉड ने हमें क्षतिपूर्ति के लिए बेसिक बैंकर्स इंडेम्निटी पॉलिसी के बजाय ज्‍यादा इंश्‍योरेंस कवर के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे फ्रॉड, जिनमें बैंक इंप्‍लॉइज भी शामिल हैं, से बैलेंस शीट की सुरक्षा के लिए बैंकों ने इंटर्नल बैंक मेकेनिज्‍म और निगरानी को तो कड़ा किया ही है, साथ ही ज्‍यादा इंश्‍योरेंस कवर पर भी विचार कर रहे हैं। इससे उन्‍हें अपनी बैलेंस शीट को प्रोटेक्‍ट करने में मदद मिलेगी। 

 

बेसिक कवर से PNB फ्रॉड का 0.2% भी नहीं होगा कवर 

बता दें कि PNB के पास केवल बेसिक बैंकर्स इंडेम्निटी पॉलिसी थी, जो केवल 2 करोड़ रुपए तक के इंप्‍लॉई फ्रॉड को ही कवर करती है। यह कवर नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए 11,400 करोड़ रुपए के फ्रॉड का 0.2 फीसदी भी कवर नहीं करता। 

 

PNB के बाद ये मामले आए सामने 

PNB में हुए फ्रॉड के बाद 390 करोड़ रुपए का एक और बैंकिंग फ्रॉड सामने आया, जो ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) में हुआ। इसमें दिल्‍ली के एक डायमंड ज्‍वेलरी एक्‍सपोर्टर को दोषी पाया गया। इसी बीच रोटोमैक पेन कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी द्वारा किया गया 3,965 करोड़ रुपए का फ्रॉड भी सामने आया। इस मामले में सीबीआई ने कई केस फाइल किए और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया। 

 

पिछले साल अकेले SBI में हुए 2,424.74 करोड़ के फ्रॉड 

2016-17 में अकेले SBI में फ्रॉड के 837 मामले सामने आए, जिनमें राशि 2,424.74 करोड़ रुपए रही। इसमें से 2,360.37 करोड़ के 278 मामले एडवांस के थे, जिन्‍हें बाद में फ्रॉड करार दिया गया। 

अभी तक बैंक इंटर्नल ऑडिट सिस्‍टम और रिस्‍क मैनेजमेंट पर कर रहे थे भरोसा 

अधिकारी ने आगे बताया कि अभी तक बैंक अपने इंटर्नल ऑडिट सिस्‍टम और रिस्‍क मैनेजमेंट पर भरोसा करने के कारण हायर इंश्‍योरेंस कवर की जरूरत महसूस नहीं कर रहे थे। लेकिन अब एक के बाद एक सामने आ रहे फ्रॉड ने उन पर दबाव बनाया है और इंडियन बैंक्‍स एसोसिएशन की हाल ही में हुई मीटिंग में इस मुद्दे पर भी चर्चा की गई। हालांकि यह कवर फ्रॉड के लिए हो सकता है लेकिन विलफुल डिफॉल्‍ट के मामले में यह काम नहीं आ सकता क्‍योंकि उसमें कई बैंकों से लोन लिया जाता है। किसी बैंक के लिए यह कवर केवल तभी काम आता है, जब फ्रॉड केवल उसी बैंक के साथ हुआ हो। 

 

 

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