Home » Economy » BankingPunjab National Says Detects 11,330 Crore Worth of Fraudulent Transaction - PNB ने 11,330 करोड़ रु के फ्रॉड का पता लगाया, मुंबई की ब्रांच से हुआ ट्रांजैक्‍शन

PNB में 11,330 करोड़ का फ्रॉड; 10 इम्‍प्‍लॉई सस्पेंड, वित्‍त मंत्रालय ने कहा- मामला कंट्रोल से बाहर नहीं

पंजाब नेशनल बैंक ने इस केस में 10 इम्‍प्‍लॉइज को सस्‍पेंड कर दिया। सरकार इस मामले पर नजर बनाए हुए है।

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मुंबई.   पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने यहां की अपनी एक ब्रांच में 11,330 करोड़ रुपए ( 1.8 अरब डॉलर) का फ्रॉड पकड़ा है। इस मामले में बैंक ने 10 इम्‍प्‍लॉइज को सस्‍पेंड कर दिया है। आरोप है कि ये लोग कुछ चुनिंदा अकाउंट होल्डर को फायदा पहुंचा रहे थे। इस खबर के सामने आने के बाद बीएसई पर PNB के स्‍टॉक्‍स में 10% तक की गिरावट दर्ज की गई। उधर, बैंकिंग सेक्रेटरी राजीव कुमार का कहना है कि सरकार इस मामले पर नजर बनाए हुए है। जरूरत पड़ने पर फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश दिए जा सकते हैं। 

 

ये मामला सामने कैसे आया? 

- पंजाब नेशनल बैंक ने बुधवार को स्‍टॉक एक्‍सचेंज बीएसई को बताया कि यह फ्रॉड कुछ चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को फायदा पहुंचाने के लिए किए गए थे। इन अकाउंट्स के जरिए 11,330 करोड़ रुपए ( 1.8 अरब डॉलर) का ट्रांजैक्शन हुआ। 

- बैंक के अनुसार, ऐसा लगता है कि इन ट्रांजैक्‍शन के आधार पर विदेश में कुछ बैंकों ने उन्हें (चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को) कर्ज दिया है। 

- ये अकाउंट्स कितने थे, कितने लोगों को फायदा हुआ? इस बारे में अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। यह मामला 2011 से जुड़ा है। 

 

कैसे हुआ फ्रॉड?

-बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के माध्यम से अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं।

-अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे।

-समझा जाता है कि पीएनबी के मामले में संदिग्ध ट्रांजैक्शन बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के जरिए हुआ।

-पीएनबी ने भले ही दूसरे लेंडर्स के नाम का उल्लेख नहीं किया, लेकिन समझा जाता है कि पीएनबी द्वारा जारी एलओयू के आधार पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और एक्सिस बैंक ने भी क्रेडिट ऑफर कर दिया था।

 

बैंक ने क्या कार्रवाई की? 

-  न्यूज एजेंसी के मुताबिक,  बैंक ने इस मामले से जुड़े 10 इम्प्लॉईज को सस्पेंड कर दिया है। उधर, बैंकिंग सेक्रेटरी राजीव कुमार ने कहा कि सरकार इस मामले पर नजर रखे हुए है। यदि जरूरत पड़ी तो फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश दिए जा सकते हैं। 

- वहीं, फाइनेंशियल सर्विसेज डिपार्टमेंट के ज्वाइंट  सेक्रेटरी लोक रंजन का कहना है, मैं नहीं मानता कि यह मामला कंट्रोल के बाहर है और इस पर इतना चिंतित होने की जरूरत है। 

 

फाइनेंस मिनिस्‍ट्री ने सभी बैंकों से मांगी स्‍टेटस रिपोर्ट 

- PNB में 11,330 करोड़ रुपए के फ्रॉड का मामला सामने आने के बाद फाइनेंस मिनिस्‍ट्री ने सभी बैंकों से इस मामले से जुड़े या हाल में हुए इस तरह के दूसरे मामलों पर रिपोर्ट मांगी है। मिनिस्‍ट्री ने इस हफ्ते के आखिर तक यह स्‍टेटस रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है। 
- सूत्रों के अनुसार, फाइनेंस मिनिस्‍ट्री ने कहा है कि संदिग्‍ध अकाउंट की स्‍क्रूटनी हो और जीरो टॉलरेंस के साथ धोखाधड़ी के मामलों में उचित कार्रवाई होनी चाहिए। 

 

नीरव मोदी से जुड़ा हो सकता है ये मामला

- न्‍यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी कि सीबीआई को पीएनबी की तरफ से हीरा कारोबारी नीरव मोदी और एक ज्‍वैलरी कंपनी के खिलाफ दो शिकायतें मिली हैं। ये शिकायत 10 हजार करोड़ रुपए के 'शैडो ट्रांजैक्‍शन' को लेकर थींं।

-हालांकि, पीएनबी ने बुधवार को बीएसई को फाइलिंग में नीरव मोदी के नाम का जिक्र नहीं किया था। 

- बता दें, पिछले हफ्ते सीबीआई ने पीएनबी की ओर से नीरव मोदी, उनकी पत्‍नी और एक बिजनेस के खिलाफ 280 करोड़ रुपए से ज्‍यादा की धोखाधड़ी की शिकायत पर मामला दर्ज किया था। इस मामले में नीरव मोदी पर देर शाम मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी दर्ज हो गया है। धोखाधड़ी का यह मामला 2017 का है। दरअसल, पीएनबी ने जूलर और कुछ अन्य पर 4.4 करोड़ डॉलर के फर्जीवाड़े की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 

 

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आरोपी कर्मचारियों के नाम का खुलासा नहीं किया बैंक ने 

- बैंक ने इस धोखाधड़ी में शामिल लोगों के नाम का खुलासा नहीं किया है। लेकिन, उसने बताया कि इस डील की जानकारी एन्‍फोर्समेंट एजेंसियों को दी जा चुकी है।

- बैंक ने बताया कि वह बाद में इस बात का आकलन करेगा कि क्या इन ट्रांजैक्शन से उसकी कोई देनदारी बनती है? 

 

ऐसे मामलों से बैंकों की मुश्किल बढ़ी

- पहले से ही एनपीए की समस्‍या से जूझ रहे सरकारी बैंकों के लिए इस तरह के फ्रॉड के मामले नई मुसीबत बन सकते हैं। सिर्फ दिसंबर तिमाही में बैंकों का एनपीए 34.5 फीसदी बढ़ गया है।

- रेटिंग एजेंसी इकरा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एसेट क्वालिटी को लेकर बैंकों की समस्या अभी हल होती नहीं दिख रही है। रिपोर्ट में कुल 30 बड़े बैंकों के तिमाही नतीजों को आधार बनाया गया। इसमें 17 प्राइवेट बैंक और 13 सरकारी बैंक के नतीजे शामिल हैं। इनका कंबाइंड ग्रॉस एनपीए एक साल पहले की तिमाही की तुलना में 8.34 फीसदी से बढ़कर 9.45 फीसदी तक पहुंच गया है। वहीं, इस दौरान प्राइवेट बैंक का एनपीए रेश्‍यो 4.1 फीसदी पर मेनटेन है, जबकि सरकारी बैंकों का एनपीए रेश्‍यो 12.4 फीसदी रहा है।

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