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Home » Economy » BankingMore than 50 percent ATMs may shut down due to new RBI rules

RBI के नियमों के कारण 1 मार्च से बंद हो सकते हैं आधे से ज्यादा एटीएम, बन सकते हैं नोटबंदी जैसे हालात

कमाई कम होने का कारण कंपनियों उठा सकती हैं कदम

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नई दिल्ली। एटीएम को अत्यधिक सुरक्षित बनाने और लोगों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से नए नियम बनाए गए हैं। अब यह नए नियम एटीएम का संचालन करने वाली कंपनियों पर भारी पड़ रहे हैं। कंपनियों का कहना है कि नए नियमों के कारण उनको लाभ नहीं हो रहा है। इस कारण वह मार्च में आधे से ज्यादा एटीएम बंद करने पर मजबूर हो सकते हैं। 

 

सरकार-RBI से चार्ज बढ़ाने की मांग
देश में इस समय करीब 80 फीसदी एटीएम का संचालन आउटसोर्सिंग के जरिए किया जाता है। एटीएम का संचालन करने वाली एक कंपनी के बड़े अधिकारी का कहना है कि नए नियमों के कारण एटीएम संचालन करने में दिक्कत हो रही है। साथ ही मार्जिन में भी कमी आई है। अधिकारी का कहना है कि एटीएम का संचालन करने वाली कंपनियों ने सरकार और RBI से एटीएम चार्ज को बढ़ाने की मांग की गई है। कंपनियों ने दावा किया है कि यदि इस चार्ज में बढ़ोतरी नहीं की गई तो 1 मार्च के बाद उन्हें एटीएम बंद करने पर मजबूर होना पड़ सकता है। यदि ऐसा होता है तो मार्च में देशभर में आधे से ज्यादा एटीएम बंद हो सकते हैं। 

 

इसलिए लेना पड़ रहा फैसला
एटीएम का संचालन करने वाली कंपनियों का कहना है कि RBI के नए नियमों के बाद कैश ले जाने वाले खर्च में बढ़ोतरी हो गई है। इसका कारण यह है कि नए नियमों के मुताबिक अब उन्हें नोट रखने के लिए दोगुने कैसेट लेकर जाने पड़ते हैं। इससे कैश में जगह कम रह जाती है और उन्हें ज्यादा चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसके अलावा RBI के नियमों के अनुसार कैश वैन में आर्म्ड गार्ड ले जाने के कारण भी खर्च में बढ़ोतरी हो गई है। 

फिर बन सकते हैं नोटबंदी जैसे हालात


देश में इस समय करीब 2 लाख एटीएम का संचालन हो रहा है। यदि कंपनियों चार्ज नहीं बढ़ने पर आधे एटीएम बंद कर देती हैं तो लोगों को कैश निकालने के लिए दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। यदि ऐसा होता है तो एटीएम पर एक बार फिर नोटबंदी की तरह कैश निकालने के लिए लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ सकता है। 

बैंकों पर दबाव बना रही हैं कंपनियां


उधर, नेशनल आर्गेनाइजेशन आफ बैंक वर्कर्स के उपाध्यक्ष अश्विनी राणा का कहना है कि बैंकों और आउटसोर्सिंग कंपनियों के बीच पहले ही सभी शर्तें तय होती है। इस बीच कंपनियों की ओर से खर्च बढ़ने के नाम पर चार्ज बढ़ाने की मांग करना गलत है। राणा का कहना है कि ऐसी मांगों के जरिए आउटसोर्सिंग कंपनियां बैंकों पर दबाव बना रही हैं। 

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