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LIC बन गया बैंक, खरीद लिए एक बैंक के 82,75,90,885 शेयर

जल्द ही कार्यों के बंटवारे को लेकर एलआईसी में होगी अहम बैठक

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नई दिल्ली। आखिरकार LIC बैंक बन गया। LIC (life insurance corporation of india) ने IDBI बैंक के 82,75,90,885 शेयर खरीद लिए हैं। अब आईडीबीआई बैंक में एलआईसी की हिस्सेदारी 51 फीसदी हो जाएगी। इसके साथ ही इस बैंक पर एलआईसी का स्वामित्व हो जाएगा। एलआईसी ने प्रति शेयर 60.73 रुपए के हिसाब से खरीदी है। आई़डीबीआई बैंक पहले ही एलआईसी को बैंक के प्रमोटर के रूप में मान्यता दे चुका है। पिछले साल 7 नवंबर को बैंक के बोर्ड की बैठक में यह मंजूरी दी गई थी। अगले एक साल में LIC और IDBI के बीच सारी व्यवस्थाएं तय कर ली जाएंगी। 

आईडीबीआई बैंक के लगभग 1.5 करोड़ रिटेल कस्टमर्स और 18,000 इम्प्लॉइज हैं। रेग्युलेटरी फाइलिंग में बैंक ने कहा कि बैंक की 1800 ब्रांचेस को एलआईसी पॉलिसीज बेचने के लिए टच प्वाइंट्स के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
 

 

कई साल से घाटे में चल रहा था आईडीबीआई

आईडीबीआई बैंक पिछले कई सालों से घाटे में चल रहा है और इसे उबारने के लिए सरकार इस बैंक में अपनी हिस्सेदारी को बेचना चाह रही थी। आईडीबीआई की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि एलआईसी ने 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का काम पूरा कर लिया है। बयान में कहा गया है कि बैंक बोर्ड की तरफ से बैंक के सीईओ के रूप में राकेश शर्मा के कार्यकाल का विस्तार कर दिया गया है। केपी नैयर भी बैंक के लिए काम करते रहेंगे। सूत्रों के मुताबिक, एलआईसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि बैंक के लिए पर्याप्त पूंजी की व्यवस्था होती रहे।

तीसरी तिमाही के नतीजों की अभी तक घोषणा नहीं

 

पूंजी की उपलब्धता के हिसाब से आईडीबीआई बैंक की हालत काफी खराब चल रही है। पिछले साल जुलाई-सितंबर तिमाही के परिणाम में लगातार 8वीं बार बैंक को घाटे का सामना करना पड़ा। इस  वजह से बैंक की पूंजी के स्तर पर में लगातार कमी आ रही है और यह स्तर सरकार की तरफ से तय न्यूनतम पूंजी की उपलब्धता से भी नीचे चली गई है। अभी आईडीबीआई बैंक की तरफ से चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के वित्तीय परिणाम की घोषणा नहीं की गई है। 

BAD LOANS की वसूली न होने से पूंजी की कमी बनी

 

सूत्रों के मुताबिक, बैंक के BAD LOANS की सही तरीके से वसूली नहीं होने की वजह से बैंक के पास पूंजी  की कमी होती जा रही है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान बैंक का एनपीए रेशियो 30.78 फीसदी था, जो दूसरी तिमाही में बढ़कर 31.78 फीसदी हो गया। बैड लोन के लगातार बढ़ने से रिजर्व बैंक बैंक की स्थिति में सुधार के लिए लगातार प्रयासरत था।

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