इन बातों को ध्यान में रखकर करें ELSS फंड्स में निवेश, टैक्स बचत के साथ होती है मोटी कमाई

Keeping these things in mind investing in ELSS funds leads to tax savings इक्विटी  लिंक्ड  सेविंग्स  स्कीम संक्षिप्त  में  ELSS  भी  कहा  जाता  है  यह एक  डाइवर्सिफाइड  इक्विटी  फण्ड  है  जो  अपने अधिकतम  कार्पस  को  इक्विटी  फण्ड  में  निवेश  करता  है। ELSS  इनकम  टैक्स  के  सेक्शन  80C के तहत आने  वाली  बहुत  ही  लोकप्रिय  स्कीम  है  जिसमे  इनकम  टैक्स  की  बचत  भी  होती  है  और  निवेशित  पूंजी  में  भी  वृद्धि  होती  है ।

Money Bhaskar

Apr 01,2019 01:40:00 PM IST

नई दिल्ली। इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम संक्षिप्त में ELSS भी कहा जाता है यह एक डाइवर्सिफाइड इक्विटी फण्ड है जो अपने अधिकतम कार्पस को इक्विटी फण्ड में निवेश करता है। ELSS इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत आने वाली बहुत ही लोकप्रिय स्कीम है जिसमे इनकम टैक्स की बचत भी होती है और निवेशित पूंजी में भी वृद्धि होती है । इस स्कीम में तीन साल का लॉक इन पीरियड होता है और 500 रुपए की न्यूनतम राशि जमा करा के भी आप इस स्कीम में निवेश कर सकते हैं।

इस स्कीम में जो लोग निवेश करते हैं उनके द्वारा लगायी हुई निवेशित पूंजी को फण्ड प्रबंधक द्वारा अलग अलग उद्योगों और आकार की कंपनियों के शेयरों में निवेश किया जाता है जिससे की फण्ड में वृद्धि होती है |यह एक ओपेन एंडेड स्कीम है जिसमे कभी भी निवेश कर सकते हैं और तीन साल के बाद कभी भी बहार निकल सकते हैं । ELSS की स्कीम में कई बड़ी कंपनियों के म्यूच्यूअल फण्ड हैं जिनमे निवेश किया जा सकता है ।

ELSS फण्ड में निवेश करने की कोई अधिकतम सीमा नहीं है लेकिन टैक्स की बचत केवल एक साल में अधिकतम 1.5 लाख रूपए तक ही प्राप्त की जा सकती है । इस फण्ड की एक खासियत यह भी है की इस फण्ड से मिलने वाला रिटर्न भी कर मुक्त होता है । हालांकि यदि आपने इस फण्ड में निवेश किया है तो तीन साल पुरे होने से पहले आप इसमें निवेश की गयी पूंजी नहीं निकाल सकते ।

ELSS में निवेश करने के तरीके:

ELSS फण्ड में निवेश करने के लिए निवेशक के पास मुख्यतयः तीन तरह के विकल्प उपलब्ध होते हैं :

·ग्रोथ विकल्प- इस ऑप्शन में फण्ड प्रॉफिट बनता है तो उस राशि को दोबारा निवेश किया जाता है । जब फण्ड की NAV बढ़ती है तो फण्ड को प्रॉफिट होता है परन्तु जब फण्ड की NAV निचे गिरती है तो फण्ड को लॉस होता है । इसलिए जब फण्ड को प्रॉफिट हो तब अपने पैसे निकाल लेना या इन्वेस्टमेंट को बेचना सही होता है।

·डिविडेंड पेआउट विकल्प- इस ऑप्शन में फण्ड का लाभ निवेशकों को डिविडेंड के रूप में प्रतिमास या निश्चित अवधी पर दिया जाता है । जब डिविडेंड घोषित किया जाता है तब फण्ड की NAV में गिराव आ जाता है।

·डिविडेंड रीइन्वेस्टमेंट विकल्प- इस ऑप्शन में जब डिविडेंड घोषित किया जाता है तब निवेशकों को प्रॉफिट नकद न देते हुए उनकी राशि का निवेश और ज़्यादा यूनिट्स में किया जाता है । इस तरह निवेशकों के यूनिट्स की संख्या बढ़ जाती है ।

ELSS में निवेश करते वक्त किन बातों का रखें ध्यान:

·ELSS में निवेश वित्तयी वर्ष की शुरुआत में जितना जल्दी किया जाए उतना बेहतर है । इससे आप उस वर्ष बेहतर कर छूट का दावा कर सकते हैं ।
·ELSS में निवेश करते वक्त यह ध्यान रखें की आप किसी विश्वसनीय फण्ड का ही चुनाव करें क्योंकि आप उसमे अगले तीन साल तक बदलाव नहीं कर सकते । इसलिए सोच समझकर और अपने विश्वसनीय वित्तीय सलाहकार से चर्चा करके व जानकारी लेकर ही निवेश करें ।
·निवेश करते वक्त एक या दो साल के रिटर्न पर ध्यान ना दें बल्कि लम्बे अवधी के रिटर्न पर ध्यान दें। कम से कम तीन से पांच साल के रिटर्न को देखते हुए फण्ड का चुनाव किया जाये तो बेहतर होगा। छोटी पूंजी वाले निवेशक ज़्यादा जोखिम वाली योजनओं से दूर ही रहें तो अच्छा है ।
·ELSS में निवेश का एकमात्र आधार कर में छूट प्राप्त करना ही नहीं होना चाहिए । आपको योजना में लॉक इन पीरियड , रिटर्न और फण्ड ख्याति का भी ध्यान रखना चाहिए ।

-- मनीष गुप्ता (सीए एवं टैक्स एक्सपर्ट)

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