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बच्‍चे के नाम पर खुलवा रखा है बैंक खाता, 18 की उम्र होते ही करें 4 काम

बच्‍चा बालिग होने के बाद भी अकाउंट को सुचारू रूप से कर सकेगा ऑपरेट...

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नई दिल्‍ली. अक्‍सर लोग बच्‍चे के फ्यूचर के लिए उसके बालिग यानी 18 साल का होने से पहले ही बैंक अकाउंट खुलवा देते हैं। नाबालिग बच्‍चे के नाम पर सेविंग्‍स, फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट अकाउंट खुलवाया जा सकता है। अगर आपने भी अपने नाबालिग बच्‍चे के नाम पर कोई बैंक अकाउंट खुलवा रखा है और बच्‍चा 18 साल का होने वाला है तो कुछ बातों पर ध्‍यान देना जरूरी है। ये बातें बच्‍चे के बालिग होने पर उसके माइनर अकाउंट को मेजर अकाउंट में बदलने को लेकर हैं। ऐसा करने पर आपका बच्‍चा बालिग होने के बाद भी सुचारू रूप से अपने अकाउंट को ऑपरेट करता रहेगा। 

 

पहले जान लें माइनर अकाउंट की ये जरूरी डिटेल

10 साल से ज्‍यादा उम्र के बच्‍चे को बैंकिंग नियमों के मुताबिक यह अधिकार है कि वह चाहे तो स्‍वतंत्र रूप से अपना सेविंग्‍स अकाउंट खुलवा या ऑपरेट कर सकता है। हालांकि बैंक जोखिमों को देखते हुए बच्‍चे की उम्र को ध्‍यान में रखकर ट्रांजेक्‍शन की एक लिमिट तय कर देते हैं, जो सामान्‍य सेविंग्‍स या डिपॉजिट अकाउंट्स की लिमिट से कम होती है। बच्‍चा केवल उसी लिमिट के अंदर स्‍वतंत्र रूप से अकाउंट ऑपरेट कर सकता है। बच्‍चा बालिग हो गया हो और वह इस लिमिट से बाहर अकाउंट ऑपरेट कर सके, इसके लिए उसके 18 साल का होते ही 4 काम करना जरूरी हो जाता है- 

 

अकाउंट के मोड ऑफ ऑपरेशन में बदलाव

बच्‍चा नाबालिग से बालिग हो चुका है और अपने अकाउंट को खुद हैंडल कर सके, इसके लिए अकाउंट का ऑपरेशन मोड बदलवा सकते हैं। ऐसे में एप्‍लीकेशन के साथ चेंज ऑफ मैनडेट फॉर्म अटैच करना होता है।

 

सिग्नेचर कराएं रजिस्‍टर्ड

जब आप बच्‍चे के नाम पर अकाउंट खुलवाते हैं तो उसके नाबालिग रहने तक उस अकाउंट से संबंधित सारी प्रोसेस मां-बाप या गार्जियन पूरी करते हैं। लेकिन जब बच्‍चा 18 साल का हो जाता है तो उसके पास अपने अकाउंट से ट्रांजेक्‍शन और बाकी की संबंधित गतिविधियां करने का अधिकार आ जाता है। लेकिन वह ऐसा कर सके, इसके लिए उसके सिग्‍नेचर बैंक में रजिस्‍टर्ड कराने जरूरी होते हैं। इसके लिए बैंक में रिकॉर्ड्स अपडेट करने के लिए एक फॉर्म भरवाया जाता है। इसमें बच्‍चे के साथ माता-पिता के सिग्‍नेचर भी लिए जाते हैं।

  
बच्‍चे को बैंक में रहना होता है मौजूद

बैंक बालिग हुए बच्‍चे के पर्सनल वेरिफिकेशन की मांग रख सकते हैं। ऐसे में बच्‍चे को खुद बैंक में मौजूद रहना होता है और सभी जरूरी कागजी कार्यवाही पूरी करनी होती है।  

 

आगे पढ़ें- बाकी डिटेल्‍स  

 

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वेरिफिकेशन के लिए देने होते हैं डॉक्‍युमेंट्स

बच्‍चे के 18 साल का होने पर बैंक आपसे एक नया अकाउंट ओपनिंग फॉर्म भरवाते हैं। इसमें बच्‍चे के लेटेस्‍ट केवाईसी डॉक्‍युमेंट्स अटैच करने होते हैं। इसके अलावा बच्‍चे का डेट ऑफ बर्थ प्रूफ भी उसकी उम्र के वेरिफिकेशन के लिए उपलब्‍ध कराना होता है। 

 

आगे पढ़ें- ये कर सकता है बालिग बच्‍चा

 

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बना सकता है नॉमिनी

जब बच्‍चा 18 साल का हो जाए तो वह अपने अकाउंट के लिए किसी को नॉमिनी नियुक्‍त कर सकता है। वहीं अगर पहले से अकाउंट का कोई नॉमिनी है तो वह उसमें बदलाव करने का भी अधिकार पा लेता है। व हीं बालिग होने के बाद वह अपने अकाउंट को एक सामान्‍य बैंक अकाउंट की तरह ऑपरेट करने के लिए पूरी तरह स्‍वतंत्र होता है। उसके ऊपर माइनर अकाउंट वाली कोई ट्रांजेक्‍शन लिमिट नहीं रहती है। 

 

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